अविनाशी मंदिर, कोयम्बटूर से 40 किमी की दूरी पर ईरोड जाने वाली सड़क के किनारे स्थित है। यह पंड्या साम्राज्य के ‘सुन्दर पंड्या’ द्वारा 15 वीं शताब्दी में बनवाया गया था। किम्वादंतियों के अनुसार दो छोटे भाई यहाँ टैंक में नहाने आए थे उनमें से एक को झील में रहने वाले मगरमच्छ ने निगल लिया।
तब से तीन साल बाद जो लड़का बच गया था उसका यज्ञोपवीत संस्कार मिश्रित भावनाओं के साथ आयोजित किया गया। ‘सुन्दर मूर्ती नयनार’ जो इस क्षेत्र से गुजर रहे थे, उन्होंने यह कहानी सुनी। तब इस कहानी से प्रेरित होकर उन्होंने एक गीत की रचना की और मृत बच्चे को उसके माता-पिता को वापस देने के लिए विनती करनेवाला, भगवान शिव के लिए एक गीत गाया था।
जाहिर सी बात है कि पानी एक बार फिर से खाली टंकी में भर गया और मगरमच्छ पूरे और जीवित लड़के को अपने मुँह से निकाल कर वापस करने के लिए बाहर आया था। यदि आप तिरुपुर में हैं तो एक बार इस मंदिर के दर्शन आपको जरूर करना चाहिए। मंदिर की गाड़ी इसकी प्रमुख सुर्ख़ियों में से एक है जो पूरे दक्षिण भारत की अपनी तरह की सबसे बड़ी गाड़ी है।



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