वेधशाला उज्जैन की प्रसिद्ध वेधशाला है जिसे 1719 में जयपुर के महाराजा सवाई राज जयसिंह द्वारा बनवाया गया था। यह सच है कि प्राचीन भारत में उज्जैन ज्योतिष विद्या के अध्ययन केंद्रों में से एक था। उत्तरी भारत में कैलेंडर पंचांग के रूप् में जाना जाता है और यह उज्जैन मेंकी जाने वाली गणनाओं के आधार पर बनाया जाता है।
यह वेधशाला शाहर के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित है और इस वेधशाला में चार स्मारक स्थित हैं।वेधशाला में एक तारामंडल और एक दूरबीन है तथा यह जगह पर्यटकों के लिए अच्छी मानी जाती है। चार में से तीसरे स्मारक को दिग्नाशा यंत्र कहते हैं तथा इस स्मारक की सहायता से सितारों व ग्रहों की स्थिति की गणना की जाती है।
इस वेधशाला में ’सन डायल’ बहुत प्रसिद्ध है क्योंकि यह उपकरण मुख्य रूप से किसी भी खगोलीय वस्तु का खगोलीय विशुवत रेखा से किसी भी प्रकार के झुकाव की गणना करने के लिए उपयोग किया जाता है।



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