Search
  • Follow NativePlanet
Share
होम » स्थल » वड़ोदरा » आकर्षण
  • 01सयाजी बाग

    इस बाग को 1879 में महाराजा सयाजीराव तृतीय ने बनवाया था। 45 हेक्टियर में फैले इस बाग में एक फ्लावर क्लॉक, दो म्यूजियम, एक तारामंडल, एक चिड़ियाघर और एक टॉय ट्रेन है। तारामंडल के ठीक बगल में एक एस्ट्रोनॉमी पार्क भी है, जहां आप प्रचीन भारत के एस्ट्रोनॉमिकल उपकरण देख...

    + अधिक पढ़ें
  • 02राजमहल

    लक्ष्मी विलास पैलेस

    वड़ोदरा के राजमहल 1890 में महाराजा सयाजीराव के समय में बनवाए गए थे। महल के निर्माण के लिए उन्होंने मेजर चार्ल्स मेंट को नियुक्त किया था। वहीं बाद में काम को पूरा किया था आरएफ चिसोल्म ने। इंडो-सारासेनिक परंपरा से बने इन...

    + अधिक पढ़ें
  • 03ईएमई मंदिर

    ईएमई मंदिर

    इस मंदिर को इलेक्ट्रीकल एंड मैकेनिकल इंजीनियरिंग द्वारा बनाया गया है। इसकी खास बात यह है कि इसका निर्माण एल्युमिनियम शीट से किया गया है। इसमें दक्षिणमूर्ति (शिव) की प्रतिमा के अलावा अन्य धार्मिक संकेत भी देखे जा सकते हैं। इस मंदिर की वास्तुशिल्पीय बनावट काफी...

    + अधिक पढ़ें
  • 04एमएस यूनिवर्सिटी

    महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी पश्चिमी भारत का सबसे विख्यात शैक्षणिक संस्थान है। यहां एक पुरातात्त्विक विभाग भी है, जहां हड़प्पा सभ्यता और बौद्ध स्थल देवी-नी-मोरी में पाए गए अवशेषों को रखा गया है। इसके अलावा यहां ह्यूमन जेनाम रिसर्च, सोशल वर्क और टेक्नोलॉजी विभाग भी...

    + अधिक पढ़ें
  • 05वड़ोदरा म्यूजियम

    सयाजीबाग के दो म्यूजियम में से एक वड़ोदरा म्यूजियम है। इस म्यूजियम का निर्माण महाराजा सयाजीराव तृतीय के संरक्षण में मेजर चार्ल्स मंट और आरएफ चिसोल्म ने 1894 में करवाया था। इस म्यूजियम में मुलग लघुचित्र, मूर्ति और टेक्सटाइल से लेकर जापान, तिब्बत और नेपाल की वस्तुओं...

    + अधिक पढ़ें
  • 06अंकोत्तका

    अंकोत्तका

    अंकोत्तका (वर्तमान में अकोता) एक छोटा सा कस्बा है, जो विश्वामित्री नदी के दाएं किनारे पर स्थित है। 5वीं और 6ठी शताब्दी में यह जगह जैन धर्म और जैन अध्ययन का प्रमुख केन्द्र हुआ करता था। अब तक यहां से र्तीथकर के 68 कांसे का चित्र खोजा जा चुका है और इन्हें वड़ोदरा...

    + अधिक पढ़ें
  • 07दभोई

    दभोई वड़ोदरा का एक कस्बा है, जिसे पहले दर्भावती नाम से जाना जाता था। इस प्रचीन शहर का गिरनार के जैन धर्मग्रथों में बहुत महत्व है। दभोई का किला हिंदू सेना की वास्तुशिल्प का एक दुर्लभ उदाहरण है, जिसे आज भी देखा जा सकता है।

    शहर में चार दरवाजें हैं- पूर्व में...

    + अधिक पढ़ें
  • 08अन्य भवन

    1 - तामबेकर वाड़ा

    यह भवन एक समय में वड़ोदरा के दीवान का घर हुआ करता था। फिलहाल यह भारतीय पुरातात्त्विक सर्वेक्षण के अंतर्गत है। यह भवन 19वीं शताब्दी की भित्ती चित्रों के लिए जाना जाता है, जिसे मराठा परंपरा के अनुसार बनाया गया था। इसके...

    + अधिक पढ़ें
  • 09पुरातत्व विभाग, एमएस यूनिवर्सिटी, वड़ोदरा

    पुरातत्व विभाग, एमएस यूनिवर्सिटी, वड़ोदरा

    एमएस यूनिवर्सिटी का पुरातत्व विभाग देवी-नी-मोरी में पाए गए बौद्ध अवशेषों के लिए जाना जाता है। इसके अलावा यहां खुदाई में मिले हड़प्पा सभ्यता के सभी ऐतिहासिक अवशेषों को देखा जा सकता है।

    + अधिक पढ़ें
  • 10वड़ोदरा वेटलैंड एंड ईको कैंपसाइट

    वड़ोदरा वेटलैंड एंड ईको कैंपसाइट

    वड़ोदरा वेटलैंड एंड ईको कैंपसाइट एक जलाशय है, जिसका इस्तेमाल आसपास के 25 गांवों में सिंचाई के लिए किया जाता है। यह वेटलैंड दभोई से 10 किमी दूर है। बर्डवॉचिंग के लिए भी एक यह एक अच्छा स्थान है और यहां आप स्टाक, टर्न, आइबिस और स्पूनबिल जैसे पक्षियों को देख सकते...

    + अधिक पढ़ें
  • 11श्री अरविंदो निवास

    यह आश्रम वड़ोदरा शहर के डांडिया बाजार में स्थित है। ऋषि अरविंदो घोष कभी सयाजीराव तृतीय के निजी सचिव और बड़ौदा कॉलेज में अंग्रेजी के प्रोफेसर व उप-प्राचार्य थे। यही बड़ौदा कॉलेज आज एमएस यूनिवर्सिटी के नाम से जाना जाता है। गुजरात में रहने के दौरान वह इसी आश्रम में...

    + अधिक पढ़ें
  • 12छोटा उदयपुर

    राजस्थान सीमा पर स्थित छोटा उदयपुर पूर्वी गुजरात के शाही रियासतों में से एक है। यह एक झील के किनारे बसा है और यहां ढेरों मंदिरें हैं। यहां के जैन मंदिर में विक्टोरियन वास्तुशिल्पीय शैली की झलक मिलती है। वहीं कुसुम विलास महल और प्रेम भवन को शाही परिवार की अनुमति...

    + अधिक पढ़ें
  • 13कडिया डूंगर की गुफाएं

    इन गुफाओं का इतिहास पहली और दूसरी शताब्दी से मिलता है। ये सभी बौद्ध गुफाएं हैं और इसमें विशालकाय सिंह स्तंभ बने हुए हैं। पहाड़ी पर कुल मिलाकर सात गुफाएं और ईंट से बना एक स्तूप भी है।

    + अधिक पढ़ें
  • 14सुरसागर तालाब

    सुरसागर तालाब

    यह एक मानवनिर्मित झील है जहां पर्यटकों के लिए बोटिंग की सुविधा भी है। गणोश चतुर्थी के मौके पर ज्यादातर गणोश प्रतिमा में इसी झील में विसजिर्त किया जाता है।

    + अधिक पढ़ें
  • 15संखेड़ा

    संखेड़ा में खराड़ी समुदाय के लोग बढ़ई का काम करते हैं। वे लकड़ी की रौगन की हुई जालियों का निर्माण करते हैं, जिन्हें इस जगह के नाम के कारण संखेड़ा कहा जाता है। रोचक बात यह है कि अपनी उत्कृष्टता के कारण इसे पूरी दुनिया में जाना जाता है।

    + अधिक पढ़ें
One Way
Return
From (Departure City)
To (Destination City)
Depart On
29 Jul,Wed
Return On
30 Jul,Thu
Travellers
1 Traveller(s)

Add Passenger

  • Adults(12+ YEARS)
    1
  • Childrens(2-12 YEARS)
    0
  • Infants(0-2 YEARS)
    0
Cabin Class
Economy

Choose a class

  • Economy
  • Business Class
  • Premium Economy
Check In
29 Jul,Wed
Check Out
30 Jul,Thu
Guests and Rooms
1 Person, 1 Room
Room 1
  • Guests
    2
Pickup Location
Drop Location
Depart On
29 Jul,Wed
Return On
30 Jul,Thu