वाराणसी को बनारस और काशी के नाम से भी जाना जाता है। यह शहर, दुनिया में सबसे प्राचीन और निरंतर आगे बढ़ने वाला शहर है। इस शहर को भगवान शिव की नगरी कहा जाता है। भगवान शिव, हिंदुओं के प्रमुख देवता है जिन्हे सृजन और विनाश का प्रतीक माना जाता है। वाराणसी, हिंदू धर्म के सबसे पवित्रतम शहरों में से एक है। इस शहर को लेकर हिंदू धर्म में बड़ी मान्यता है कि अगर कोई व्यक्ति यहां आकर मर जाता है या काशी में उसका अंतिम सस्ंकार हो, तो उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है यानि उस व्यक्ति को जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। इसीलिए, इस जगह को मुक्ति स्थल भी कहा जाता है।
वाराणसी के बारे में लोगों का अटूट विश्वास है कि यहां बहने पवित्र नदी गंगा में यदि डुबकी लगा ली जाएं तो सारे पाप धुल जाते है। कई पर्यटकों के लिए, गंगा नदी में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय डुबकी लगाना एक अनोखा और यादगार अनुभव होता है। वाराणसी के मुख्य घाटों पर हर शाम को आरती ( प्रार्थना ) का आयोजन किया जाता है।
इस रहस्यमयी शहर का सबसे आकर्षक पहलू यह है कि यहां स्थित मुख्य घाटों पर सभी संस्कार और अनुष्ठानों को पूरा किया जाता है जिनमें हर कार्य का भली प्रकार आयोजन और समापन होता है, लोग गंगा में डुबकी लगाते है, आरती होती है, शवों का दाह संस्कार किया जाता है, उन्हे स्नान भी करवाया जाता है। इन क्रियाकलापों के अलावा, आप यहां नदी के तट पर लोगों को योगा, मसाज, दाड़ी बनाते हुए और क्रिकेट जैसे खेल खेलते भी देख सकते है।
वाराणसी और आसपास के इलाकों में पर्यटन स्थल
वाराणसी शहर, पूरी तरह से धार्मिक रंग में रंगा हुआ है। इस शहर का सबसे दिलचस्प पहलू यहां स्थित कई घाट है। इन घाटों से गंगा जी तक जाने के लिए कई सीढि़यों से उतरना पड़ता है। इन सभी घाटों में से कुछ घाट काफी विख्यात हैं जिनमें दशाश्वमेध प्रचलित घाट है, यहां हर सुबह और शाम को भव्य आरती का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा, दरभंगा घाट, हनुमान घाट और मैन मंदिर घाट भी प्रमुख है।
वाराणसी पूरी दुनिया में एकमात्र ऐसा शहर है जहां पर्यटकों को '' मौत पर्यटन '' की सुविधा प्रदान की जाती है। पर्यटक यहां के मणिकर्णिका घाट पर कई शवों का एकसाथ अंतिम संस्कार होते हुए देख सकते है, इन शवों को यहां स्नान कराया जाता है, जलाया जाता है और बाद में उनकी राख और अस्थियों का विसर्जन गंगा में कर दिया जाता है। यहां के अस्सी घाट में सबसे ज्यादा होटल और रेस्टोरेंट है। इसके अलावा, यहां के तुलसी घाट, हरिश्चंद्र घाट, शिवाला घाट और अत्यधिक प्रकाशित केदार घाट भी किसी परिचय के मोहताज नहीं है।
वाराणसी को भगवान शिव का निवास स्थान कहा जाता है और इसीकारण यहां काशी विश्वनाथ मंदिर स्थित है जो भगवान शिव को समर्पित है। काशी विश्वनाथ मंदिर के अलावा यहां नया काशी विश्वनाथ मंदिर भी है जो वाराणसी के बीएचयू परिसर में बना हुआ है। इसके अलावा, यहां कई उल्लेखनीय मंदिर जैसे तुलसी मानस मंदिर और दुर्गा मंदिर भी है। यहां मुस्लिमों के धर्म का प्रतिनिधित्व करने वाली आलमगीर मस्जिद है जबकि जैन भक्त, जैन मंदिर में शांति के लिए जाते है।
धार्मिक स्थलों के अलावा, वाराणसी में नदी के दूसरी तरफ राम नगर किला है और जंतर - मंतर है जो कि एक वेधशाला है। इस शहर में वाराणसी हिंदू विश्वविद्यालय भी स्थित है जिसका परिसर बेहद शांतिपूर्ण वातावरण में बना हुआ है। इस विश्वविद्यालय को पूर्व का ऑक्सफोर्ड कहा जाता है। यह शहर शास्त्रीय नृत्य, संगीत और योग के लिए विख्यात है।
वाराणसी भ्रमण करने का सबसे अच्छा समय
वाराणसी घूमने का सबसे अच्छा समय दिसम्बर से फरवरी तक होता है।
वाराणसी कैसे पहुंचे
वाराणसी तक एयर द्वारा, ट्रेन द्वारा और सड़क मार्ग से आसानी से पहुंच सकते है।



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