सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ हाईयर तिब्बती स्टडी ( सीआईएचटीएस ) को वाराणसी में पंडित जवाहर लाल नेहरू ( भारत के प्रथम प्रधानमंत्री ) ने 1967 में दलाई लामा के साथ परामर्श के बाद स्थापित किया था। सीआईएचटीएस उन युवा पुरूषों और महिलाओं के लिए स्थापित किया गया है जो तिब्बत से आकर भारत में निर्वासन कर रहे है।
साथ ही यह स्टडी सेंटर उन लोगों के लिए भी है जो हिमालय क्षेत्र के करीब सीमावर्ती क्षेत्रों में निवास करते है। सीआईएचटीएस, पहले भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के संस्कृति विभाग के तहत एक स्वायत्त शैक्षणिक संस्था थी, जिसे 1988 में डीम्ड यूनीवर्सिटी का दर्जा प्रदान कर दिया गया था।
यह विश्वविद्यालय भारत में एक अनोखा शिक्षा स्थल है जहां बुद्धोलॉजी, तिब्बतीलॉजी और हिमालय अध्ययन पर पढ़ाया जाता है और बकायदा रिसर्च भी करवाई जाती है। इसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा प्राप्त है और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए सीआईएचटीएस को राष्ट्रीय मूल्यांकन एंव प्रत्यायन, एनएएसी के द्वारा फाइव स्टार का दर्जा दिया गया है।
इस इस्ंटीट्यूट में शैंताराशिता लाइब्रेरी है जहां कई दुर्लभ पुस्तकों का व्यापक संग्रह है, इनमें भारतीय और बौद्ध साहित्य से जुड़ी कई पुस्तकें व पांडुलिपि भी है।



Click it and Unblock the Notifications