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होम » स्थल » वृंदावन » आकर्षण
  • 01जयपुर मंदिर

    जयपुर मंदिर

    वृंदावन स्थित जयपुर मंदिर 1917 में जयपुर के महराज द्वारा बनवाया गया एक प्रमुख मंदिर है। इसे बनाने में 30 साल से भी ज्यादा का समय लगा था और कई हजार लोगों ने काम किया था। ऐसा कहा जाता है कि महाराज ने खुद साल दर साल इसके निर्माण और संरचना का निरीक्षण किया था।

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  • 02केसी घाट

    ऐसा माना जाता है कि वृंदावन में ही भागवान कृष्ण ने बचपन का अधिकांश समय बिताया था। ऐसी मान्यता है कि केसी घाट पर ही भगवान कृष्ण दुष्ट राक्षस केशी से लड़े थे और अपने मित्रों व समुदाय को उनकी दुष्टता से बचाया था। आज भी केसी घाट इस घटना को अपने हृदय में समाए हुए...

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  • 03शाहजी मंदिर

    शाहजी मंदिर

    वैसे तो अधिकांश मंदिर सिर्फ पूजा की जगह होती है, लेकिन वृंदावन का शाहजी मंदिर इसका अपवाद है। यह मंदिर अपनी खूबसूरती और विशिष्ट वास्तुशिल्प के लिए भी जाना जाता है। 19वीं शताब्दी में बने इस मंदिर की बनावट महल की तरह है और इसकी डिजाइन व नक्काशी बेजोड़ है।

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  • 04श्री राधा रास बिहारी अष्ट सखी मंदिर

    श्री राधा रास बिहारी अष्ट सखी मंदिर

    कृष्ण जन्मभूमि की जगह पर बना श्री राधा रास बिहारी अष्ट सखी मंदिर भारत का सबसे पुराना मंदिर है। यह मंदिर राधा-कृष्ण और राधा की आठ सखी को समर्पित है। राधा की ये आठ सखी राधा-कृष्ण के प्रेम में घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई थी। राधा और कृष्ण के बीच रासलीला भी यहीं हुई...

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  • 05इस्कान मंदिर

    1975 में बने इस्कान मंदिर को श्री कृष्ण बलराम मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह मंदिर ठीक उसी जगह पर बना है, जहां आज से 5000 साल पहले भगवान कृष्ण दूसरे बच्चों के साथ खेला करते थे।

    मंदिर में कई सुंदर चित्रकारी की गई है, जिसमें भगवान...

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  • 06राधा रमन मंदिर

    वृंदावन स्थित राधा रमन मंदिर एक प्रसिद्ध प्रचीन हिंदू मंदिर है। इसका निर्माण 1542 में किया गया था और इसे वृंदावन का सबसे पूजनीय और पवित्र मंदिर माना जाता है। मंदिर में की गई खूबसूरत नक्काशी से आरंभिक भारतीय कला, संस्कृति और धर्म की झलक मिलती है। इसका निर्माण गोपाल...

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  • 07गोविंद देव मंदिर

    गोविंद देव मंदिर

    भगवान शिव को समर्पित गोविंद देव मंदिर एक जाना-माना मंदिर है। इसे गोविंद देव भी कहा जाता है। चूंकि कृष्ण ने अपने बचपन का काफी समय वृंदावन में गुजारा था, इसलिए यहां उन्हें और उनके जीवन को समर्पित कई मंदिर और तीर्थ स्थल हैं। गोविंद देव मंदिर हजारों व्यक्तियों के कठिन...

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  • 08यमुना नदी

    यमुना नदी

    यमुना भारत की पवित्र नदियों में से एक है। यह उत्तराखंड के हिमालय में 6387 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलती है।  इसके बाद यह उत्तर की दिशा में बहती है और वृंदावन व मथुरा होते हुए दिल्ली पहुंचती है।

    केसी घाट के पास यमुना नदी का हिस्सा...

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  • 09गोपेश्वर महादेव मंदिर

    गोपेश्वर महादेव मंदिर

    वृंदावन स्थित गोपेश्वर महादेव मंदिर एक और महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। यह शहर के कुछ उन गिने चुने मंदिरों में से है, जो भगवान शिव को समर्पित है और भगवान कृष्ण से गहरे जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथा के अनुसार भागवान शिव एक बार भगवान कृष्ण और गोपियों का रासलीला नृत्य देखना...

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  • 10रंगजी मंदिर

    रंगजी मंदिर वृंदावन के कुछ उन गिने चुने मंदिरों में से एक है जो श्रेष्ठ द्रविड वास्तुशिल्प शैली में बना है। इसे 1851 में बनवाया गया था और इसमें मुख्य देवता के रूप में श्री रंगनाथ या रंगजी विराजमान हैं। मंदिर की दीवारें काफी ऊंची है और इसमें 50 फीट का द्वाजस्तंभ...

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  • 11बांके बिहारी मंदिर

    वृंदावन में स्थित बांके बिहारी मंदिर एक हिंदू मंदिर है, जिसे प्रचीन गायक तानसेन के गुरू स्वमी हरिदास ने बनवाया था। भगवान कृष्ण को समर्पित इस मंदिर में राजस्थानी शैली की बेहतरीन नक्काशी की गई है। बांके का शब्दिक अर्थ होता है- तीन जगह से मुड़ा हुआ और बिहारी का अर्थ...

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  • 12राधा गोकुलनंद मंदिर

    राधा गोकुलनंद मंदिर

    राधा गोकुलनंद मंदिर केसी घाट और राधा रमन मंदिर के बीच स्थित है। यह एक प्रचीन पवित्र तीर्थस्थल है, जो कई देवियों को समर्पित है। मंदिर में राधा, विजया और गोविंदा के अलावा अन्य को प्रतिष्ठापित किया गया है। पुराने समय में यहां की देवियों की अलग-ललग पूजा की जाती...

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  • 13मदन मोहन मंदिर

    मदन मोहन मंदिर वृंदावन में काली घाट के पास स्थित है। यह इस क्षेत्र के पुराने मंदिरों में से एक है। आज जिस जगह पर मंदिर बना है, वहां पुराने समय में सिर्फ विशाल जंगल हुआ करते थे। भगवान मदन गोपाल की मूल प्रतिमा आज इस मंदिर में नहीं है। मुगल शासन के दौरान इसे राजस्थान...

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  • 14सेवा कुंज और निधुबन

    सेवा कुंज और निधुबन खूबसूरत फुलवारी हैं, जिसका अस्तित्व भगवान कृष्ण के समय से है। ऐसा माना जाता है कि यहीं पर भगवान कृष्ण ने राधा और अन्य गोपियों के साथ रासलीला किया था। फुलवारी में ही एक छोटा सा नक्काशीदार मंदिर है, जो भगवान कृष्ण और उनकी संगिनी राधा को समर्पित...

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