गारो हिल्स में स्थित एक गाँव डारिबोकग्रे नोकरेक राष्ट्रीय पार्क से केवल 3 कि.मी. दूर है। प्रौद्योगिकी और कृषि के क्षेत्र में मशीनरी के आने से शारीरिक श्रम का उपयोग कम हो गया है, जिसके कारण अर्थव्यवस्था को बनाए रखने के लिए लोग दूसरे साधन जैसे ग्रामीण पर्यटन आदि का सहारा लेने को मजबूर हो रहे हैं। डारिबोकग्रे गाँव ऐसा ही एक उदाहरण है।
डारिबोकग्रे ग्रामीण पर्यटन का मुख्य मकसद यात्रियों को ग्रामीण जीवन शैली से परिचित कराने और उसमें शामिल करना है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य कार्य नोकरेक राष्ट्रीय पार्क या गारो हिल्स की सबसे ऊँची चोटी नोकरेक पीक आने वाले यात्रियों को ठहरने की सुविधा प्रदान करना है।
गाँव का समुदाय अपने मेहमानों के लिए आराम से रहने का प्रबंध करता है। आप 200 से 400 रूपए तक के किफायती किराए पर एक झोपड़ी या ट्री-हाउस ले सकते हैं। ये झोपडि़याँ साधारण तरीके से सजी हैं जिसमें लकड़ी के स्वच्छ बाथरूम भी हैं। यात्रियों के अनुरोध पर स्थानीय गारो व्यंजनों के साथ साधारण भोजन भी तैयार किया जाता है।
डारिबोकग्रे ग्रामीण पर्यटन के सौम्य आतिथ्य का अनुभव करते हुए यात्री अन्य गतिविधियों जैसे नेचर वाक, बर्ड वाचिंग तथा ट्रैकिंग का मज़ा भी ले सकते हैं। तुरा से टूरिस्ट बस लेकर आन डारिबोकग्रे तक पहुँच सकते हैं।



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