नाना राव पार्क को कंपनी बाग़ भी कहा जाता है। ब्रिटिश शासन काल में इसे मेमोरियल वेल कहा जाता था क्योंकि 1857 के स्वतंत्रता युद्ध के समय नाना साहिब के नेतृत्व में भारतीय स्वतंत्रता सैनानियों ने लगभग 200 ब्रिटिश महिलाओं और बच्चों को इस कुएं में डाल दिया था। वह इमारत जिसमें नरसंहार हुआ उसे बीबीघर कहा जाता था।
इसके पास स्थित कुएं में पीड़ितों को डाल दिया गया। अत: भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ में इस पार्क का ऐतिहासिक महत्व बहुत अधिक है। ब्रिटिश सैनिकों ने अपने हमवतनों की मौत का बदला लेने के लिए भारतीयों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए इस बंद क्षेत्र का उपयोग किया।
इस ऐतिहासिक भवन को खड़ा करने के लिए उन्होंने कानपुर के लोगों को 30,000 पौंड्स का भुगतान करने के लिए मजबूर किया। भारत की स्वतंत्रता के बाद भारत की सरकार ने इस ब्रिटिश स्मारक को ढहा दिया। वर्तमान में इस पार्क में 1857 के संघर्ष के महान नेताओं जैसे तात्या टोपे, अज़ीजा बाई और झांसी की रानी की मूर्तियां हैं।



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