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होम » स्थल » ऐहोल » आकर्षण
  • 01हालाबसाप्‍पान्‍ना गुडी

    हालाबसाप्‍पान्‍ना गुडी

    हालाबसाप्‍पनान्‍ना गुडी, ऐहोल का सबसे आकर्षक स्‍थल है जहां पर्यटकों को सैर करने की सलाह दी जाती है। यह एक छोटा सा गांव है जो ऐहोल के पश्चिमी ओर स्थित है, यहां एक छोटा सा मंदिर है जिसमें एक हॉल और एक गर्भगृह बना हुआ है। इस मंदिर के दरवाजों पर गंगा और...

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  • 02अम्‍बीगेरा गुडी

    अम्‍बीगेरा गुडी

    अम्‍बीगेरा गुडी, तीन मंदिरों का समूह है जो 10 वीं सदी में बनाएं गए थे। यह तीनों मंदिर, दुर्गा मंदिर और चिक्‍कीगुडी के पास में ही स्थित है और ऐहोल किले के पास में बने हैं। इन तीन बड़े मंदिरों में रेखांगना टॉवर भी शामिल है जिसे भी 10 वीं शताब्‍दी में ही...

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  • 03हचीमल्‍ली गुडी

    हचीमल्‍ली गुडी

    हचीमल्‍ली गुडी, मंदिरों का एक समूह है जो भगवान शिव, ब्रह्मा और विष्‍णु को समर्पित है। इस मंदिर की स्‍थापना 7 वीं सदी में की गई थी, यह ऐहोल के सबसे प्राचीन मंदिरों में से ए‍क है। समय मिलने पर पर्यटकों को यहां अवश्‍य आना चाहिए। इस मंदिर की बाहरी...

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  • 04त्रियम्‍बकेश्‍वर समूह

    त्रियम्‍बकेश्‍वर समूह

    त्रियम्‍बकेश्‍वर समूह, ऐहोल के प्रमुख मंदिरों में से एक है जो यहां का मुख्‍य आकर्षण माना जाता है। इस परिसर में कई मंदिर स्थित है जिनमें से त्रिकुटचलस और मद्दीनागुडी प्रमुख है। त्रिकुटचलस मंदिर का शाब्दिक अर्थ होता है - त्रिकोशकीय मंदिर। इस मंदिर का...

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  • 05संग्रहालय

    संग्रहालय

    मंदिरों के अलावा, ऐहोल में संग्रहालय और आर्ट गैलरी भी स्थित है जो दुर्गा मंदिर परिसर में बना हुआ है। इस मूर्ति गैलरी की देखभाल, भारतीय पुरातत्‍व विभाग द्वारा की जाती है। अगर पर्यटकों के पास ऐहोल की यात्रा के बाद समय बचता है तो उन्‍हे यहां अवश्‍य आना...

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  • 06राची समूह

    राची समूह

    राची समूह, एक त्रिकुटचला शिव मंदिर है जिसका निर्माण 11 वीं सदी में करवाया गया था। यह मंदिर, पश्चिम की ओर मुंह किए हुए है जो ऊंचाई पर बना हुआ है। इस मंदिर में तीन सेल्‍स है जो अलग - अलग दिशाओं में स्थित है। मंदिर की बाहरी दीवारों पर, भगवान नटराज का छोटा सा...

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  • 07बादीगेरा गुडी

    बादीगेरा गुडी

    जो पर्यटक ऐहोल की यात्रा पर जाएं, वह बादीगेरा गुडी की सैर का प्‍लान अवश्‍य बनाएं। इस श्राइन को शुरूआत में सूर्या मंदिर के नाम से जाना जाता है जो रेखांगारा के पास में स्थित है। यह मंदिर 9 वीं सदी में बनाया गया था, जिसमें एक हॉल, एक पोर्च और एक सेल मंदिर है।...

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  • 08रामलिंग समूह

    रामलिंग समूह

    पर्यटक ऐहोल आने पर रामलिंगा मंदिर में अवश्‍य आएं। यह मंदिर येनियार मंदिर के पास ही स्थित है। इस मंदिर को त्रिकुटाचाला ने डिजायन किया था। इस मंदिर में दो शिवलिंग है जो भगवान शिव को और उनकी पत्‍नी को समर्पित है। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 11 वीं सदी...

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  • 09हचाप्‍पय्या मत्‍था

    हचाप्‍पय्या मत्‍था

    हचाप्‍पय्या मत्‍था, ऐहोल में स्थित मंदिरों में से प्रमुख है जो भगवान शिव को समर्पित है और ऐहोल गांव के पश्चिमी ओर स्थित है। इस गुडी को 8 वीं सदी में बनवाया गया था। इस मंदिर में एक मुख्‍यमंडप, एक गर्भगृह और चालुक्‍य शैली में बनी कृतियां भी देखने को...

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  • 10गौड़ा मंदिर

    गौड़ा मंदिर

    गौड़ा मंदिर एक 12 वीं सदी का मंदिर है जो देवी भगवती को समर्पित है और इस मंदिर को ऐहोल के सबसे प्रमुख पर्यटक आकर्षणों में से एक गिना जाता है। य ह मंदिर कल्‍याण चालुक्‍य वास्‍तुकला में बना हुआ है और इस मंदिर की बाहरी दीवार में 16 खंभे बने हुए है जो एक...

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  • 11गालागंनाथा समूह

    गालागंनाथा समूह

    ऐहोल की यात्रा के दौरान पर्यटकों को गलांगनाथा समूह की सैर पर अवश्‍य जाना चाहिए। इस मंदिर समूह में कुल 38 मंदिर स्थित है जो मालाप्रभा नदी के तट पर स्थित है। इस मंदिर समूह का प्रमुख मंदिर गलांगनाथा के नाम से जाना जाता है जिसे 8 वीं सदी में बनवाया गया था। इस...

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  • 12सूर्यनारायण मंदिर

    सूर्यनारायण मंदिर

    भगवान सूर्य को समर्पित इस मंदिर में रेखांगारा शैली की कई कलाकृतियां बनी  हुई है। इस मंदिर में भगवान सूर्य की अपने साथी ऊषा और संध्‍या के साथ रथ पर बैठी हुई 2 फीट  ऊंची प्रतिमा बनी हुई है। इनके अलावा आप ऐहोल में गोडा मंदिर, हालावासा पन्‍ना गुडी,...

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  • 13येनियार श्राइन

    येनियार श्राइन

    येनियार मंदिर, 8 मंदिरों का समूह है जो मालाप्रभा नदी के तट पर, ऐहोल के दक्षिण में स्थित है। माना जाता है कि इन मंदिरों का निर्माण 12 वीं सदी में हुआ था। पोर्च, हॉल और छतें, इस मंदिर की प्रमुखता है। ऐहोल आने वाले सभी पर्यटकों को येनियार श्राइन की सैर के लिए...

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  • 14मेगानगुडी समूह

    मेगानगुडी समूह

    मेगानगुडी को मेगुती के नाम से भी जाना जाता है जो कि एक जैन मंदिर है और यह मंदिर द्रविण शैली की वास्‍तुकला में निर्मित है। जो भी पर्यटक ऐहोल की यात्रा पर आते है उन्‍हे इस समूह की यात्रा की सलाह दी जाती है। इस मंदिर के समूह को लगभग 5 वीं सदी में बनवाया गया...

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  • 15रावन फाड़ी

    पर्यटक जब भी ऐहोल की यात्रा पर आएं तो रावण फाड़ी की सैर अवश्‍य करें। यह पूरे ऐहोल में सबसे पुराना गुफा मंदिर है। भगवान शिव को समर्पित इस जगह में ऐहोल की सबसे बड़ी गुफा है। इस गुफा के अंदर दो बड़े-बड़े मंदिर है। यहां भगवान शिव की नृत्‍य करते हुए कई चित्र...

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