चरणतिमाथा समूह, कल्याण चालुक्य शैली वास्तुकला में बना हुआ है जिसे लगभग 11 वीं और 12 वीं शताब्दी में बनवाया गया था। इस मंदिर में पाएं जाने वाले शिलालेखों से मंदिर के अस्तित्व के बारे में जानकारी मिलती है। शिलालेखों के अनुसार, यह मंदिर 1120 ई. पू. में बनकर तैयार हुआ था। इस मंदिर के परिसर में स्थित अन्य मंदिरों में त्रिकुटचाला मंदिर सबसे प्रमुख है। यह मंदिर, तीन मंदिरों का समूह है जो एक ही हॉल में स्थित है। पर्यटक यहां आकर मंदिर परिसर में बासड़ी भी देख सकते है, प्रत्येक में 12 तीर्थांकर स्थित है। इस मंदिर का नाम इस क्षेत्र के नाम पर रखा गया, जो स्थानीय लोगों के बीच चरणीनाथ के नाम से जाना जाता है। अगर पर्यटकों को समय मिलें तो ऐहोल की यात्रा के दौरान यहां अवश्य आएं।



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