संगम एक संस्कृत शब्द है, जिसका शाब्दिक अर्थ होता है- मिलना। देखा जाए तो संगम भारत की तीन पवित्र नदियों की मिलन स्थली है। "त्रिवेणी संगम" इसका आधिकारिक नाम है और यहां गंगा, जमुना और लोककथाओं के अनुसार सरस्वती नदी आपस में मिलती है। ऐसा माना जाता है कि सरस्वती नदी जमीन के अंदर समा गई है। यह जगह हिन्दू और पंडितों द्वारा काफी पवित्र समझा जाता है।
उनका मानना है कि यहां डुबकी लगाने से सारे बुरे कर्म धुल जाते हैं और मनुष्य पुनर्जन्म की प्रक्रिया से भी मुक्त हो जाता है। यह जगह हर 12 साल में एक बार कुंभ मेला आयोजित करने के लिए प्रसिद्ध है। यहां हर 6 साल बाद अर्धकुंभ का आयोजन भी किया जाता है।
इसके अलावा हर साल जनवरी में यहां माघ मेला लगता है। श्रद्धालू कड़ाके की ठंड के बावजूद यहां पवित्र डुबकी लगाते हैं। साथ ही यहां राष्ट्र के कई बड़े नेताओं की अस्थियां भी बहाई गई हैं। 1948 में महात्मा गांधी की अस्थि को भी संगम में ही विसर्जित किया गया था।



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