दुख भंजनी स्वर्ण मंदिर में अमृत सरोवर के पूर्वी छोर पर स्थित है। यह परिसर में स्थित तीन पवित्र जुजेबे वृक्षों में से एक है। दुख भंजनी बेर वृक्ष से जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार इसके बगल में स्थित कुंड में नहाने से बीवी रंजनी के पति का कुष्ठ रोग ठीक हो गया था।
जब गुरू रामदास ने इस चमत्कार के बारे में सुना तो उन्होंने इस कुंड को एक नहाने वाले तालाब में बदल दिया। साथ ही उस पेड़ का नाम दुख भंजनी बेर रखा, जिसका मतलब होता है- दुख मिटाने वाला। उन्होंने अपने पूर्वाधिकारी और ससुर गुरू अमर दास जी की सलाह को मानते हुए इस स्थान को सिक्खों की अध्यात्मिक राजधानी बनाया।
देखा जाए तो अगर दुख भंजनी बेर वृक्ष के आसपास के पानी में कुष्ठ रोग ठीक करने का विशिष्ट गुण नहीं होता तो शायद अमृत सरोवर और स्वर्ण मंदिर का भी अस्तित्व नहीं होता। दुख भंजनी बेर वृक्ष के पास बने इस कुंड के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा इसे अवश्य घूमने वाली जगह बना देती है।



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