गुरुद्वारा छेहरटा साहिब अमृतसर से 7 किमी दूर गुरू की वडाली गांव में स्थित है। छठे सिख गुरू, गुरू हरगोविंद सिंह जी इसी गांव में पैदा हुए थे। अपने बेटे के जन्म का जश्न मनाने के लिए गुरू अर्जुन देव जी ने यहां पर एक बड़े से छेहरटा नामक कुएं का निर्माण किया था।
छह पहिए इस कुएं से पानी निकालते थे। अब इन पहियों को ढंक दिया गया है और मुख्य तालाब को पानी आपूर्ति करने के लिए इसमें पंप लगाए गए हैं। एक प्रचीन कुएं के नाम पर नामित यह गुरुद्वारा काफी फैला हुआ है और इसमें एक सभागृह भी है, जिसके बीच में चौकोर गर्भगृह है।
गर्भगृह के ठीक ऊपर कमल के आकार का गुंदब है, जिस पर सोने की परत चढ़ी हुई है। इस सभागृह के ठीक सामने दो 25 मीटर ऊंचे फ्लैग पोस्ट बने हुए हैं और दोनों पर सिक्ख झंडा निशान साहिब फहराया गया है। इस गुरुद्वारा का प्रबंधन शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के हाथों में हैं। अमृतसर में अगर आपके पास पर्याप्त समय हो तो इसे भी घूमा जा सकता है।



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