अमृतसर के प्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर के पिछले हिस्से में स्थित गुरुद्वारा माता कौलन एक पवित्र तीर्थस्थल है। इस गुरुद्वारे का निर्माण गुरू हरगोविंद की पूजा करने वाले पाकिस्तान के एक काजी की बेटी बीवी कौलन की याद में किया गया है।
जब उनके पिता ने उनकी मौत के बारे मे बताया तो संत मियां मीर जी उसे बचाकर अपने गुरू की शरण में अमृतसर ले आए। यहां उन्होंने अपनी बची हुई जिंदगी मानव जाति को समर्पित कर दी। अन्य गुरुद्वारों की तरह ही गुरुद्वारा माता कौलन कौलसर सरोवर नामक पवित्र तालाब के किनारे पर बना है।
छठे सिक्ख गुरू, गुरू हरगोविंद सिंह जी ने श्रद्धालुओं को यह निर्देश दिए थे कि वह स्वर्ण मंदिर में प्रवेश से पहले कौलसर सरोवर में स्नान जरूर करें। पवित्र तालाब के पश्चिमी छोर पर माता कौलन जी की समाधि भी है। यह गुरुद्वारा सिक्ख श्रद्धालुओं के बीच काफी पूज्य है और अगर आप अमृतसर घूमने जा रहे हैं तो यहां जरूर जाएं।



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