बादामी की सैर करने वाले पर्यटकों को पुरातात्विक संग्रहालय की सैर अवश्य करनी चाहिए जो इस शहर का एक प्रमुख आकर्षण है। इस संग्रहालय का निर्माण भारतीय पुरातत्व विभाग ने वर्ष 1979 में किया था तथा पहले इसका उपयोग शिलालेखों, मूर्तियों तथा खोजे गए पदार्थों के संरक्षण के लिए किया जाता था। हालाँकि वर्ष 1982 में इसे एक संग्रहालय में परिवर्तित कर दिया गया जो स्थानीय मूर्तिकला के अद्वितीय समूह को प्रदर्शित करती है।
संग्रहालय की सैर करते समय पर्यटक उर्वरता संप्रदाय के लज्जा – गौरी के चित्र भी देख सकते हैं तथा साथ ही साथ यहाँ आदिम शिलालेख भी हैं जो माना जाता है कि 6 वीं और 16 वीं शताब्दी के बीच के हैं। इस संग्रहालय में चार गैलरियां हैं जिनमें भगवान शिव तथा भगवान विष्णु की मूर्तियाँ विभिन्न रूपों में दिखाई गई है। इसके अलावा भगवान गणपति तथा भगवद्गीता के दृश्य भी चित्रित किये गए हैं।
संग्रहालय के प्रवेश द्वार पर भगवान शिव के वाहन नंदी की मूर्ति है। इस संग्रहालय में चार गैलरियां, खुली गैलरी सामने तथा साथ ही साथ वरांडा भी है। शिदलापहाड़ी गुफा एक गैलरी है जो पर्यटकों को प्राचीन गुफा आवासों की याद दिलाती है। पत्थर की कलाकृतियों के अलावा यह गैलरी भी पूर्व ऐतिहासिक कला तथा शिलालेख प्रदर्शित करती है।
यहाँ एक खुली वरांडा गैलरी है जहाँ पर्यटक प्रमुख पत्थर देख सकते हैं जो द्वार – पलाका चित्र तथा शिलालेख हैं। संग्रहालय की नई गैलरी में कई पुरालेख तथा वास्तुकला का प्रदर्शन किया गया है।



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