लोनी गांव का अस्तित्व भगवान राम के समय में भी था। ऐसी मान्यता कि राम के छोटे भाई शत्रुघन ने इस जगह लवनासुर नाम के एक दावन की हत्या की थी। एक अन्य दंतकथा के अनुसार लोन्नकरण नाम के राजा ने इस शहर की स्थापना की थी और एक किले भी बनवाया, जिसका नाम लोनी रखा गया था। 1789 तक यह किला मौजूद था। बाद में मोहम्मद शाह ने इस किले को नष्ट कर दिया। उन्होंने किले के ईटों और अन्य समानों का प्रयोग बागीचा और तालाब बनवाने के लिए किया।
इतिहासकारों की माने तो लोनी राजा पृथ्वीराज चौहान के साम्राज्य का हिस्सा था। पर्यटक उनके द्वारा बनाए गए किले के बचे-खुचे हिस्सों को आज भी देख सकते हैं। मुग़ल काल में बनाए गए तीन बाग आज इस शहर की शोभा बढ़ा रहे हैं। ये हैं-खरजनी बाग, अलदीपुर बाग और रानप बाग।
पहला दो बाग आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर की बीवी जीनत महल ने लगाया था। बाद में अंग्रेजों ने इन बागों को हथिया लिया और इन्हें मेरठ के एक शेख इलाही बख्श को बेच दिया। अबादी बाग के नाम से मशहूर रानप बाग की दीवारों को यहां के स्थानीय लोगों ने काफी नुकसान पहुंचाया, लेकिन आज भी इसके कुछ भाग देखे जा सकते हैं।



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