तेली का मंदिर ग्वालियर किले में स्थित है। इसे तेल के आदमी का मंदिर कहा जाता है। यह एक बहुत बड़ी संरचना है जिसकी ऊंचाई 100 फुट है। इसकी छत की वास्तुकला द्राविड़ीयन शैली की है जबकि नक्काशियां और मूर्तियाँ उत्तर भारतीय शैली की हैं। इसकी वास्तुशैली हिंदू और बौद्ध वास्तुकला का सम्मिश्रण है।
यह ग्वालियर के किले के परिसर का सबसे पुराना स्मारक है। इसका निर्माण 11 वीं या 8 वीं शताब्दी में हुआ था। तेली का मंदिर पहले विष्णु का मंदिर था जो बाद में भगवान शिव का मंदिर बन गया। मंदिर के अंदर देवियों, साँपों, प्रेमी युगलों और गरुड़ की मूर्तियाँ हैं।



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