हम्पी की यात्रा की योजना बनाने वाले यात्रियों को हेमकूट पर्वत की तलहटी पर स्थित ससिवेकलु गणेश मंदिर के दर्शन जरुर करने चाहिए। यह मंदिर, सरसों के बीजों से मेल खाती गणेश की 8 फुट ऊंची मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है। सरसों के बीजों के साथ बनती इसकी समानता के कारण, स्थानीय लोगों ने इस मूर्ति को ससिवेकलु गणेश का नाम दिया है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान गणेश ने बहुत अधिक खाना खा लिया तो अपने पेट को फटने से रोकने के लिए उस पर एक सांप बांध लिया। यह मूर्ति एक चट्टान को काटकर बनाई गई है और यहां आप भगवान के दाहिने हाथ को एक टूटे गजदंत और अंकुश को पकड़े दे सकते हैं।
ऊपरी बायें हाथ में एक पाश है जबकि निचले बायें हाथ तथा धड़ को एक पत्थर से अलग किया गया है। ससिवेकलु गणेश मंदिर पर पहुंचने पर सैलानियों को मूर्ति एक बड़े से मंड़प से आवृत दिखाई देगी। शिलालेखों द्वारा उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मंड़प को चंद्रगिरी के एक व्यापारी द्वारा 1506 ई. में बनाया गया था। उन्होंने इस मंड़प को विजयनगर साम्राज्य के राजा नरसिंह द्वितीय के सम्मान में बनवाया था।



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