जंतर - मंतर, भारत की पांच खगोलीय वेधशालाओं में से सबसे बड़ा है जिसकी स्थापना राजा सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा की गई थी। यह वेधशाला, यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की गिनती में सम्मिलित है जिसके बारे में यूनेस्को का कथन है कि यह वेधशाला मुगल काल के खगोलीय कौशल और ब्रह्माण्ड संबंधी अवधारणाओं की अभिव्यक्ति का सर्वश्रेष्ट नमूना है।
वेधशाला के निर्माण में उत्तम गुणवत्ता वाला संगमरमर और पत्थर का इस्तेमाल किया गया है। यहां पर राम यंत्र भी रखा है जो उस काल में ऊंचाई मापने का यंत्र या साधन हुआ करता था। यह यंत्र, वेधशाला में अपने तरीके का अद्वितीय उपकरण है जो महाराजा की खगोलीय कौशल का प्रतिनिधित्व करता है।
इसके अलावा यहां अन्य उपकरण भी देखे जा सकते है जैसे- ध्रुव, दक्षिणा, नरिवल्या, राशिवाल्शया, स्मॉल सम्राट, लार्ज सम्राट, द आर्व्जवर सीट, दिशा, स्मॉल राम, लार्ज राम यंत्र, स्मॉल क्रांति, लार्ज क्रांति, राज उन्नाथामसा, जय प्रकाश और दिग्नता।



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