‘हंस’ शब्द प्रवासी पक्षी हंस को संदर्भित करता है जो हिंदू-बौद्ध विचारों के अनुसार देवी सरस्वती का वाहन है। देवी ने इस वाहन को क्यों चुना, इसका कारण ये है कि यह बहुत उंचाई पर बिना रुके 7000 मील की दूरी तय कर सकता है।
हंस एक बार-सिर वाला पक्षी है जो तिब्बत में मानसरोवर झील में रहता है और सर्दियों के दौरान हज़ारों मील की दूरी तय कर भारतीय आवास में आता है। उपनिषद के अनुसार, हंस केवल मोती खाता है एवं पानी और दूध को अलग कर सकता है यदि दोनों को मिलाकर रखा गया हो। इसके अलावा इसे पवित्र ब्रम्ह का ज्ञान भी है।
जींद की पवित्र भूमि की पौराणिक कथाओं में गहरी जड़ें हैं। जींद से पांच मील की दूरी पर स्थित इक्कास गाँव में स्थित यह एकहंस मंदिर इस बात को प्रमाणित करता है। यहाँ जींद-हंसी रोड द्वारा भी पहुंचा जा सकता है। इस पवित्र स्थल का उन महाकाव्यों में भी उल्लेख मिलता है जो भगवान् कृष्ण से संबंधित हैं। इस मंदिर में एक पेंटिंग भी जो यह दर्शाती है कि भगवान् किस प्रकार अपना प्रेम सभी पर बरसाते हैं।



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