चामुंडा माता मंदिर, जोधपुर

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चामुंडा माता मंदिर एक शाही मंदिर है जिसे जोधपुर के संस्थापक राव जोधा द्वारा निर्मित किया गया था। वे 1460 ई0 में इस देवता को जोधपुर लाये। यह मंदिर मेहरानगढ़ किले के दक्षिणी द्वार के पास स्थित है। यह जोधपुर के शाही परिवारों के लिए पूजा की एक मनपसंद जगह थी। दशहरा त्योहार की पूर्व संध्या पर इस मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

जोधपुर के लोगों का मानना है की यहाँ  500 साल पुराना एक ऐसा मंदिर है जिसने शहर को 1971 में हुए पाकिस्तान के हवाई हमलों से बचाया था।  अगर यहां के स्थानीय निवासियों की माने तो 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध के दौरान कई बम और गोले शहर और मंदिर के पास गिरे। लेकिन न तो शहर पर आंच आई और न ही मंदिर को कुछ हुआ।

स्थानीय लोगों का इस बात पर अटूट विश्वास है  कि माता चामुंडा के रक्षा कवच ने उस  समय जोधपुर की रक्षा की थी। चामुंडा माता के बारे में यहां के स्थानीय लोगों का ये भी कहना है कि वे हमेशा संकटों से जोधपुर की रक्षा करती हैं।

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