मयीलाडूतुरै में कुरूकाई सिवान मंदिर प्रमुख है जो भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर में भगवान शिव की तीसरी आंख बनी हुई है। माना जाता है कि यह मंदिर उसी स्थान पर बना है जहां भगवान शिव ने भयानक क्रोधित होने पर अपनी तीसरी आंख को खोल दिया था। इसका वर्णन महाकाव्य महाभारत में भी हुआ है।
इस आंख को बंद माता पार्वती ने करवाया था वरना पूरी सृष्टि तबाह हो जाती। कहा जाता है कि जब यह आंख बंद हो गई तो पूरे संसार में अंधेरा छा गया। लेकिन भगवान शिव के माथे से रोशनी निकली और पूरे संसार को उजाला मिला। भगवान शिव की तीसरी आंख गुस्से की निशानी है। इस मंदिर को त्रिनेत्रा, त्रिकक्षा और त्रिनयन के नाम से भी जाना जाता है।



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