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मयीलाडूतुरै आकर्षण

  • 01श्री परिमाला रंगनाथन स्‍वामी मंदिर

    श्री परिमाला रंगनाथन स्‍वामी मंदिर

    श्री परिमाला रंगनाथन स्‍वामी मंदिर, कावेरी नदी के तट पर बना 108 मंदिरों पर मंदिर है जो सभी भगवान विष्‍णु को समर्पित है। इसे अल्‍वर के कवि वैष्‍नवीत के द्वारा र्नि‍मित करवाया गया था। इस मंदिर परिसर में भगवान विष्‍णु की 12 फुट ऊंची हरे...

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  • 02पुनुगिश्‍वेश्‍वर मंदिर

    पुनुगिश्‍वेश्‍वर मंदिर

    पुनुगिश्‍वेश्‍वर मंदिर, कोरूरेनअडु में स्थित है जो भगवान शिव को समर्पित है और उनकी पत्‍नी संथा नायकी की पूजा भी यहां की जाती है। इस मंदिर का नाम पुनुगिश्‍वेश्‍वर मंदिर, यहां मोक्ष पाने वाले पुनुकु सिदेश्‍वर के नाम पर रखा गया। मयीलाडूतुरै...

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  • 03श्री काशी विश्‍वनाथ स्‍वामी मंदिर

    श्री काशी विश्‍वनाथ स्‍वामी मंदिर

    श्री काशी विश्‍वनाथ स्‍वामी मंदिर, कावेरी नदी के तट पर स्थित है जो थुला घाट पर बना है और दक्षिण के काशी के नाम से जाना जाता है। विश्‍वनाथस्‍वामी का शाब्दिक अर्थ होता है - विश्‍व का स्‍वामी। दक्षिण के निवासी अगर किसी कारणवश काशी तक नहीं जा...

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  • 04श्री वाधानेश्‍वर मंदिर

    श्री वाधानेश्‍वर मंदिर

    श्री वाधानेश्‍वर मंदिर, कावेरी नदी के तट पर स्थित है जिसे वल्‍लार कोईल के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है जो इससे जुड़े है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार जब भगवान शिव गायब हो गए तो नंदी देवा को गर्व महसूस हुआ कि वह भगवान शिव से...

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  • 05दक्षिणामूर्ति मंदिर

    दक्षिणामूर्ति मंदिर

    दक्षिणामूर्ति मंदिर, मयीलाडूतुरै शहर में स्थित है जो भगवान शिव को समर्पित मंदिर है। इस मंदिर को एक शिक्षक के ज्ञान के रूप में देखा गया है। भगवान शिव को दक्षिणामूर्ति का स्‍वरूप मानकर पूजा जाता है। यह तमिलनाडु का सबसे विख्‍यात मंदिर है। दक्षिणामूर्ति का...

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  • 06गंगाई कोंडा चोलापुरम

    गंगाई कोंडा चोलापुरम

    गंगाई कोंडा चोलापुरम को राजेंद्र चोल द्वारा स्थापित किया गया था जो पाल वंश की विजय का प्रतीक था। इसे 250 साल पहले चोल वंश की राजधानी के रूप में जाना जाता था। इस स्‍थान पर बहुत सारे राजाओं का शासन रहा है। यहां एक शिव मंदिर भी स्थित है। यह मंदिर आज भी इस क्षेत्र...

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  • 07थुला उत्‍सवम

    थुला उत्‍सवम

    थुला उत्‍सवम, मयीलाडूतुरै में एक महीने तक चलने वाला उत्‍सव है। यह उत्‍सव, पवित्र महीनों में आसपास मनाया जाता है। इसे अमूमन अक्‍टूबर से नबवंर के बीच मनाते है। इस उत्‍सव को उत्‍तर भारत के कुंभ मेले के समान मनाया जाता है। यह काफी भव्‍य और...

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  • 08कुरूकाई सिवान मंदिर

    कुरूकाई सिवान मंदिर

    मयीलाडूतुरै में कुरूकाई सिवान मंदिर प्रमुख है जो भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर में भगवान शिव की तीसरी आंख बनी हुई है। माना जाता है कि यह मंदिर उसी स्‍थान पर बना है जहां भगवान शिव ने भयानक क्रोधित होने पर अपनी तीसरी आंख को खोल दिया था। इसका वर्णन...

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  • 09श्री अय्यारप्‍पर मंदिर

    श्री अय्यारप्‍पर मंदिर

    श्री अय्यारप्‍पर मंदिर, मयीलाडूतुरै में स्थित है जो गंगाई कोंडा चोलापुरम मंदिर के समान है और ऐतिहासिक महत्‍व रखता है। जब गंगाई कोंडा चोलापुरम मंदिर की स्‍थापना की गई तो चोल वंश के राजा राजेन्‍द्र चोल ने कॉपर की प्‍लेटों पर चोल वंश के बारे में...

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  • 10श्री मयूरास्‍वामीनाथ मंदिर

    श्री मयूरास्‍वामीनाथ मंदिर

    श्री मयूरानाथस्‍वामी मंदिर को मयीलाडूतुरै के सबसे बड़े मंदिरों में से गिना जाता है। मयूरानाथ स्‍वामी का शाब्दिक अर्थ होता है - मयूरों का पति, जो इस मंदिर के मुख्‍य देवता के रूप में पूजे जाते है। किंवदंती है कि माता पार्वती को भगवान शिव के गुस्‍से के...

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