मैसूर में होते हुए इस म्यूजियम को भी घूमने की कोशिश करनी चाहिए। यह म्यूजिम खूबसूरत जयलक्ष्मी विलास हवेली में स्थित है। इसकी स्थापना 1968 में की गई थी और यहां करीब 6500 फोक्लोर आर्टिकल्स, कठपुतली, दक्षिण भारतीय खिलौने और घरेलू चीजें रखी गई हैं। इसके अलावा इस म्यूजियम में नृत्य, नाटक और संगीत के विभिन्न तत्वों को प्रदर्शनी के लिए रखा गया है। म्यूजियम की गैलरी को विभिन्न हिस्सों में बांटा गया है, जिसमें बड़े गुड्डे, फोक्लोर, साहित्य, कला और फोकलाइफ को प्रदर्शित किया गया है।
गुड्डे वाले सेक्शन में अलग-अलग आकार के गुड्डे रखे गए हैं, जिसका इस्तेमाल तालेभुता, कैभुता, मारी, सोमा और गडी मारी नृत्य में किया जाता था। वहीं फोकलाइफ सेक्शन में मछवारे, कुम्हार, नाविक, लोहार, सुनार, किसान और चर्मकार आदि के विभिन्न उपकरणों को प्रदर्शनी के लिए रखा गया है। इससे अलावा इस म्यूजियम में हथियार, कंदील, रसोई के बर्तन, खेती के उपकरण, मटकी, बरतन, जपमाला और टोकरी को भी प्रदर्शित किया गया है।
फोक्लोर सेक्शन में यक्षगणा व काताकाली के परिधान, आंध्रप्रदेश के लोक परंपरा के नाटककार और एक विशिष्ट हनुमान मुकुट के साथ-साथ कई चीजों को रखा गया है। पर्यटक यहां सोमवार से शनिवार के दौरान सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक इस म्यूजियम में जा सकते हैं। रविवार और हर दूसरे शनिवार को म्यूजियम बंद रहता है।



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