Search
  • Follow NativePlanet
Share
होम » स्थल» ऊटी

ऊटी पर्यटन – पहाड़ियों की रानी

40

ऊटी नीलगिरी की सुंदर पहाड़ियों में स्थित एक सुंदर शहर है। इस शहर का आधिकारिक नाम उटकमंड है तथा पर्यटकों की सुविधा के लिए इसे ऊटी का संक्षिप्त नाम दिया गया है। भारत के दक्षिण में स्थित इस हिल स्टेशन में कई पर्यटक आते हैं। यह शहर तमिलनाडु के नीलगिरी जिले का एक भाग है।

ऊटी शहर के चारों ओर स्थित नीलगिरी पहाड़ियों के कारण इसकी सुंदरता बढ़ जाती है। इन पहाड़ियों को ब्लू माउन्टेन (नीले पर्वत) भी कहा जाता है। कुछ लोगों का ऐसा विश्वास है कि इस स्थान का नाम यहाँ की घाटियों में 12 वर्ष में एक बार फूलने वाले कुरुंजी फूलों के कारण पड़ा। ये फूल नीले रंग के होते हैं तथा जब ये फूल खिलते हैं तो घाटियों को नीले रंग में रंग देते हैं।

इस शहर के इतिहास की जानकारी तोड़ा जनजाति से मिल सकती है क्योंकि 19 वीं शताब्दी में ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन प्रारंभ होने के पहले यहाँ इसी जनजाति का शासन था।

ऊटी में तथा इसके आसपास पर्यटन स्थल

बोटेनिकल गार्डन, डोडाबेट्टा उद्यान, ऊटी झील, कलहट्टी प्रपात और फ्लॉवर शो आदि कई कारण हैं जिनके लिए ऊटी पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। एवलेंच, ग्लेंमोर्गन का शांत और प्यारा गाँव मुकुर्थी राष्ट्रीय उद्यान आदि ऊटी के कुछ प्रमुख पर्यटन स्थल हैं।

ऊटी कैसे पहुंचें

ऊटी तक रास्ते तथा ट्रेन द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। ऊटी का निकटतम हवाई अड्डा कोयंबटूर है।

ऊटी का मौसम

ऊटी की स्थिति के कारण यहाँ का मौसम पूरे वर्ष खुशनुमा रहता है। हालाँकि ठंड में दक्षिण भारत के अन्य भागों की तुलना में यहाँ का मौसम अधिक ठंडा होता है।

औपनिवेशिक विरासत इस शहर में ब्रिटिश संस्कृति तथा वास्तुकला का प्रभाव देखा जा सकता है। वास्तव में कई पर्यटकों ने गौर किया है कि यह हिल स्टेशन सुंदर अंग्रेज़ गाँव की तरह दिखता है। शायद यही कारण है कि इस शहर को अधिकतम आय पर्यटन से होती है।

ब्रिटिश यहाँ की जलवायु तथा प्राकृतिक सुंदरता से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इस स्थान का नाम ऊटी “क्वीन ऑफ हिल स्टेशन” रखा। उनके लिए यह एक छिपे हुए खजाने के समान था क्योंकि वे दक्षिण भारत के किसी भी अन्य शहर के गर्म और नम मौसम को सहन नहीं कर सकते थे।

वे इस क्षेत्र पर अपना दावा प्रस्तुत करने के लिए इतने उत्सुक थे कि उन्होंने ऊटी के निकट स्थित वेलिंगटन शहर में मद्रास रेजीमेंट की स्थापना की। उस दिन से वेलिंगटन में मद्रास रेजीमेंट का केंद्र बना हुआ है। इसके कारण ऊटी ब्रिटिश लोगों में ग्रीष्म / सप्ताहांत स्थान के रूप में लोकप्रिय हुआ। इस शहर को मद्रास प्रेसीडेंसी की ग्रीष्मकालीन राजधानी होने का गौरव प्राप्त है।

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने ऊटी का विकास भी किया तथा यहाँ नीलगिरी में चाय, सागौन और सिनकोना का उत्पादन प्रारंभ किया।  ऊटी में तथा इसके आसपास चाय और कॉफ़ी के अनेक बागान हैं।

ऊटी का लुप्त इतिहास

ऊटी में पुराने विश्व का एक आकर्षण है जो आज भी बेजोड़ है। जब आप ऊटी में भ्रमण करते हैं तब यहाँ की वास्तुकला तथा कुछ इमारतों के डिज़ाइन को देखकर आप पुराने समय में पहुँच जाते हैं। वे आपको बीते हुए समय की याद दिलाती हैं। ऊटी के पतन का कोई इतिहास नहीं है। ब्रिटिश लोगों के आने के बाद इसका उदय प्रारंभ हुआ। हालाँकि इन बीती दो शताब्दियों में इस शहर ने ऐसा इतिहास बनाया है जो पहले कभी नहीं था या जो हमारे लिए लुप्त था।

आधुनिक विश्व के लिए ऊटी का इतिहास ब्रिटिश लोगों के आने के बाद से प्रारंभ होता है, मुख्य रूप से सिपाहियों के आने के बाद से। जैसे ही आप इस शहर में प्रवेश करते हैं वैसे ही आपको यह पता चल जाता है कि इस शहर पर ब्रिटिश लोगों का प्रभाव है। कला और इमारतों की वास्तुकला, घरों के डिज़ाइन और निर्माण की शैली सभी कुछ ब्रिटिश काल से मिलता जुलता है।

यहाँ के स्थानीय लोगों के जीवन पर ब्रिटिश परंपराओं का बहुत गहरा प्रभाव पड़ा है। स्थानीय खाद्य पदार्थों पर भी अंग्रेज़ी डिशेज़ (खाद्य पदार्थों) का प्रभाव दिखाई देता है। इसके परिणामस्वरूप आपको ऊटी में अंग्रेज़ी और भारतीय मसालों के सम्मिश्रण से बना सबसे उत्तम खाना खाने मिल सकता है।

ब्रिटिश लोगों ने मेहनती स्थानीय लोगों के साथ मिलकर ऊटी को सफलता दिलवाई। समृद्ध सांस्कृतिक विरासत केवल ऊटी में ही देखने मिलती है। अत: आज यह कहना गलत होगा कि ऊटी का कोई ऐतिहासिक भूतकाल नहीं है या भारत के विकास में इसका कोई ऐतिहासिक महत्व नहीं है।

 

ऊटी इसलिए है प्रसिद्ध

ऊटी मौसम

घूमने का सही मौसम ऊटी

  • Jan
  • Feb
  • Mar
  • Apr
  • May
  • Jun
  • July
  • Aug
  • Sep
  • Oct
  • Nov
  • Dec

कैसे पहुंचें ऊटी

  • सड़क मार्ग
    ऊटी अन्य शहरों और नगरों से अच्छे रास्तों द्वारा जुड़ा हुआ है। विभिन्न शहरों जैसे चेन्नई, कोयंबटूर, मैसूर, बैंगलोर, कोच्चि और कालीकट से ऊटी तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। अनेक लोग ऊटी जाने के लिए राज्य परिवहन की बसों का उपयोग भी करते हैं क्योंकि वे आरामदायक होने के साथ साथ निजी टैक्सियों की तुलना में सस्ती भी होती हैं। यदि आप अपने स्वयं के वाहन द्वारा रास्ते से यात्रा करने की योजना बना रहे हैं तो यह अच्छा होगा कि ऊटी की यात्रा प्रारंभ करने के पहले आप विभिन्न रास्तों की जांच कर लें।
    दिशा खोजें
  • ट्रेन द्वारा
    दक्षिण रेलवे ऊटी को भारत के अन्य भागों से जोड़ता है। ऊटी जाने के लिए नियमित तौर पर रात की ट्रेन उपलब्ध हैं। उटकमंडलम ऊटी का रेलवे स्टेशन है तथा आपको मेट्टूपलायम स्टेशन से ट्रेन बदलनी पड़ेगी क्योंकि ऊटी तक केवल मीटर गेज लाइन ही जाती है। वास्तव में नीलगिरी माउन्टेन सर्विस भारत के सबसे पुराने रेलवे ट्रेक में से एक है।
    दिशा खोजें
  • एयर द्वारा
    ऊटी में घरेलू या अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा नहीं है। निकटतम हवाई अड्डा कोयंबटूर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। हालांकि एक नई परियोजना प्रारंभ की गई है जिसके तहत कोयंबटूर से ऊटी के लिए नियमित हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध कराई जायेगी। जे. बी. एवियेशन एक हेलीकॉप्टर सेवा प्रारंभ करने की योजना बना रहा है तथा इसके लिए यह बेल 407 हेलीकॉप्टर का उपयोग करेगा।
    दिशा खोजें

ऊटी यात्रा डायरी

One Way
Return
From (Departure City)
To (Destination City)
Depart On
17 Apr,Sat
Return On
18 Apr,Sun
Travellers
1 Traveller(s)

Add Passenger

  • Adults(12+ YEARS)
    1
  • Childrens(2-12 YEARS)
    0
  • Infants(0-2 YEARS)
    0
Cabin Class
Economy

Choose a class

  • Economy
  • Business Class
  • Premium Economy
Check In
17 Apr,Sat
Check Out
18 Apr,Sun
Guests and Rooms
1 Person, 1 Room
Room 1
  • Guests
    2
Pickup Location
Drop Location
Depart On
17 Apr,Sat
Return On
18 Apr,Sun