ब्रहमा मंदिर, पुष्कर झील के किनारे पर स्थित है। यह भारत के कुछ मंदिरों में से एक है जो हिंदूओं के भगवान ब्रहमा को समर्पित है। हिंदु लोक कथाओं के अनुसार, भगवान ब्रहमा ने पुष्कर में यजन्या ( आग की पूजा ) की पूजा करने कर प्रतिज्ञा की थी। यद्पि उनकी पत्नी सावित्री इस निर्दिष्ट समय में यजन्या की पूजा करने के लिए उनके साथ मौजूद नहीं थी।
इसी कारण, उन्हे एक स्थानीय ग्वालिन गायत्री से शादी करनी पड़ी ताकि वह उनके साथ यजन्या की पूजा में बैठ सकें। भगवान ब्रहमा के इस कार्य से उनकी पहली पत्नी सावित्री को बहुत क्रोध आया और उन्होने ब्रहमा जी को शाप दे दिया कि अब उनकी पूजा पुष्कर के अलावा कहीं और नहीं की जा सकेगी।
यह मंदिर मूल रूप से 14 वीं सदी में बनाया गया था। मंदिर में राजसी छवि वाले कमल पर विराजमान, ब्रहमा जी की चार मुख वाली मूर्ति स्थापित है जिसके बाएं तरफ उनकी युवा पत्नी गायत्री और दाएं तरफ सावित्री बैठी हैं।



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