राजौरी जिला, जम्मू और कश्मीर के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है। यह गंतव्य स्थल पुंछ जिले का एक हिस्सा है। जिसकी स्थापना 1968 में की गई थी यानि राजौरी को 1968 में एक अलग जिला घोषित कर दिया गया था। इस जिले में 1194 से 1846 ई. तक जाराल वंश का शासन रहा था। धार्मिक इमारतों के रूप में राजौरी में कई मस्जिदें है जिनका निर्माण जाराल राजवंश ने 1194 से 1846 ई. के बीच करवाया। यह सभी मस्जिदें उस काल की स्थापत्य शैली का प्रतिनिधित्व करती हैं।
राजौरी के आस पास के स्थान
यहां घूमने के लिए अन्य साइटस हैं जहां पर्यटक पूरे परिवार के साथ जाकर एंजाय कर सकते है। राजौरी तक आने के लिए पर्यटकों को कई वाहनों को बदलते हुए आना होगा लेकिन यह अनुभव खास और मजेदार होगा। राजौरी ज्यादा मंहगा शहर नहीं है। यहां के पंज पीर और लाल बाउली आकर्षण के मुख्य केंद्र है।
पंज पीर एक श्राइन है, जिसके बारे में कहा जाता है कि पांच संत और उनकी बहन यहां आकर ठहरे थे। इस जगह आर्मी क्षेत्र भी है जहां जवान देश की सुरक्षा के लिए हमेशा तैनात रहते हैं। लाल बाउली एक झरना है जो राजौरी जिले में स्थित है। इस झरने में कई प्रकार की सुंदर मछलियां रहती है। यह जिला, सुंदर झरनों का अड्डा है जहां कोठारी सार, चामार सार, दिया सार, सामोट सार, गुम सार, भाग सार और अक्ल दर्शनी के खुबसूरत दृश्य देखे जा सकते है।
थन्नामंडी सराई, मंगलादेवी किला, मुरादपुर सराई और मस्जिद, नादपुर सराई और नाओगजी जियारत, राजौरी के अन्य आकर्षण है। जिले में उसमान मेमोरियल और बलिदान भवन मेजर लैंडमार्क है जो उन शहीदों की याद में बना हुआ है जिन्होने अपने प्राण पाकिस्तान लड़ाई में त्यागे और देश के लिए शहीद हो गए।
कैसे जाएं राजौरी
पर्यटक राजौरी तक हवाई मार्ग, रेल मार्ग और सड़क मार्ग से आ सकते है।
राजौरी जाने का सबसे अच्छा समय
यहां आने का सबसे अच्छा मौसम गर्मियों के दौरान अप्रैल से जून तक होता है। यहां की सर्दियों में काफी ठंडक होती है लेकिन पर्यटक पूरी तैयारी के साथ राजौरी में घूमने आ सकते हैं। आइए जानते है राजौरी के बारे में कुछ खास :



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