कीरतपुर शहर अपने गौरवशाली इतिहास और गुरुद्वारों के लिए जाना जाता है। गुरुद्वारा पताल पुरी यहां का सबसे प्रसिद्ध स्थान है, जहां सिक्ख दिवंगत की अस्थियों को बहाते हैं। इस जगह की स्थापना 1627 में सिक्ख गुरू, गुरू हरगोबिंद सिंह जी ने किया था।
साथ ही यह गुरू हर राय और गुरू हरकृष्ण का जन्म स्थान भी है। 9वें सिक्ख गुरू, गुरू तेग बहादुर सिंह जी को मुगल बादशाह औरंगजेब ने दिल्ली में मरवा दिया था। गुरू के सर को इस स्थान पर लाया गया था। यहां पर बाबनगढ़ नाम से एक गुरुद्वारा भी बनवाया गया था।
साथ ही एक मुस्लिम संत पीर बुड्ढन शाह (पौराणिक कथाओं के अनुसार जिनकी उम्र 800 साल थी) का संबंध भी इस स्थान से है। गुरुद्वारा के अलावा कीरथपुर साहिब में कई मंदिर और दरगाह भी हैं। नंगल-रूपनगर-चंडीगढ़ रोड पर स्थित कीरथपुर साहिब रूपनगर से 34 किमी उत्तर में है।



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