सकलेशपुर आने पर राष्ट्रीय राजमार्ग 48 पर स्थित मंजराबाद का किला अवष्य देखना चाहिए। इस्लामिक वास्तुकला शैली और धनुषाकार प्रवेशद्वार को दर्शाता यह किला समुद्रतल से 3240 फीट ऊपर है। एक सुरक्षित स्थान बनाने के नज़रिए से मैसूर के शासक टीपू सुल्तान ने इस किले को बनवाया था। यह किला इसलिए उचित था क्योंकि यह उन सभी रास्तों को रोकता था जो पास के तटीय क्षेत्रों से सकलेशपुर के पीछे बने पठार तक पहुँचने के लिए प्रयोग किया जा सकता था।
टीपू सुल्तान के शासनकाल में यह किला गोला बारूद रखने और मंगलोर से उनकी ओर आने वाले अंग्रेज़ों पर नज़र रखने के लिए उपयोग किया जाता था। मंजराबाद का किला एक छोटी पहाड़ी पर बना है और अन्य किलों के विपरीत केवल एक ही निर्माण स्तर पर आधारित है।
पश्चिमी घाट का बेहद सुंदर नज़ारा दिखाने वाले इस किले में केवल क्रास आकार के गड्डे ही पानी का स्रोत हैं।इस सितारा आकार के किले का निर्माण 1785 में शुरु होकर 1792 में समाप्त हुआ। इस किले में बहुत सारे कमरें हैं, जिनमें से कुछ घोड़ों के अस्तबल के रूप में और कुछ सैनिकों की रसोई व बाथरूम के लिए उपयोग किए जाते थे।
पर्यटक यहाँ श्रीरंगपटना तक जाने वाली एक सुरंग भी देख सकते हैं जो बाद में शव दफनाने के लिए इस्तेमाल की गई। सकलेशपुर, कर्नाटक के हसन जिले में स्थित एक हिल स्टेशन है। इस जगह साल भर उष्णकटिबंधीय यानी गर्म जलवायु रहती है।



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