जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि डेरा या घर, महान सूफी संत की स्मृति में बनवाया गया। यह हरियाणा के सिरसा जिले में संगार सदन में स्थित है। डेरा के अधिकांश अनुयायी कम्बोज समुदाय के सदस्य है क्योंकि बाबा, कम्बोज परिवार में पैदा हुए थे।
बाबा भूमान शाह को आमतौर पर बाबा भूमान के नाम से जाना जाता है जो भारत के प्रमुख उदासी संतों में से एक थे। उनका जन्म 14 अप्रैल, 1687 को पाकिस्तान के ओकारा जिले के बिहोलपुर गांव में हुआ था। उनका नाम भूमिया था। उनके माता - पिता श्रद्धा के साथ गुरूनानक और उदासी पंथ व सम्प्रदाय के बाबा श्री चंद के अनुयायी थे।
बाबा का मन बचपन से ही धार्मिक कार्यो में ज्यादा लगता था, उन्होने 14 साल की उम्र से ही पाकपट्टन के उदासी पंथ के गुरू बाबा प्रियम दास का अनुसरण करना शुरू कर दिया था, उन्होने ही इन्हे बाबा भूमान शाह नाम दिया था। उन्होने कीर्तन, भजन और लंगर के दौरान शांति और भाईचारे का उपदेश देना शुरू कर दिया था।
ऐसा माना जाता है कि सिक्खों के दसवें गुरू गुरू गोविंद सिंह ने उन्हे यह कहकर वरदान दिया था कि उनका लंगर कभी बंद नहीं होगा, उसमें किसी भी प्रकार की कोई कमी कभी भी नहीं आएगी। 1762 में बाबा की मृत्यु हो गई, लेकिन उनकी विरासत को मंहत व धार्मिक सरदारों के द्वारा सम्हाल कर रखा गया है। देश के विभाजन के बाद, बाबा भूमान के अनुयायियों ने अपना डेरा सिरसा में डाल लिया और उनके पद्चिन्हों पर चलकर सारी दुनिया में उनकी शिक्षाओं को फैलाया।



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