मस्जिद-ए-आला के नाम से प्रसिद्ध जामा मस्जिद, श्रीरंगापट्नम आने पर अवश्य देखें। यह मस्जिद 1784 में मैसूर पर कब्जा करने के बाद टीपू सुल्तान ने बनवाया था। ऐसा माना जाता है कि टीपू सुल्तान ने स्वयं इस मस्जिद में सबसे पहली नमाज़ पढ़ी थी। यह जगह टीपू सुल्तान के पसंदीदा स्थानों में से एक माना जाता है।
दो मंजि़ला मस्जिद पर काफी छोटा श्वेत रंग का गुंबद और दो प्रबल मीनारें हैं। मस्जिद में टिकटिक करती एक घड़ी है जो 97वर्ष पुरानी होने पर भी चल रही है। पश्चिम दिशा में इस मस्जिद के बरामदे में ‘मेहराब‘ के साथ प्रार्थना हाल है। एक ऊँचे उठे हुएबेसमेंट पर बनी इस मस्जिद में सामने की ओर एक खुला मैदान है।
दो अष्टकोण मीनारों पर गुंबद बने हैं जिनपर कबूतर-छिद्रों की कतारें बनी हैं। आसपास के क्षेत्रों का शानदार नज़ारा मीनारों की छत से देखा जा सकता है जहाँ 200 कदमों की चढ़ाई के बाद पहुँचा जा सकता है। ऐसा कहा जाता है कि स्वर्गीय अब्दुल हाफि़ज़ जुनैदी मस्जिद में अकेले इमाम थे और 50वर्षों से नमाज़ अदा कर रहे थे।पर्यटक अल्लाह के 99 नामों से युक्त शिलालेख यहाँ देख सकते हैं। एक मदरसा भी मस्जिद के परिसर में स्थित है।



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