त्यागराजस्वामी मंदिर, तमिलनाडू के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। इसे लगभग एक सौ साल पहले चोल वंश के द्वारा बनाया गया था। इस मंदिर का परिसर 33 एकड़ के क्षेत्रफल में फैला हुआ है और इस क्षेत्र में कई छोटे - छोटे मंदिर बने हुए है।
इस मंदिर का मुख्य भाग, दो हिस्सों में विभाजित है, एक भाग में भगवान शिव के वाल्मिकीनाथर स्वरूप की पूजा की जाती है। जबकि दूसरे भाग में त्यागराजर की पूजा की जाती है। यह दोनों ही भाग, दर्शनार्थियों के लिए हमेशा खुले रहते है। दोनों ही भागों में भगवान शिव के रूपों की आराधना होती है।
वाल्मिकीनाथर श्राइन में पुतुरू को शिवलिंग के स्थान पर रखा गया है। इस मंदिर में यहां गाएं जाने भजन काफी लोकप्रिय होते है। जिन्हे 7 वीं सदी के सेवा नयाम्मर्स द्वारा बनाया गया था। इस मंदिर की यात्रा का सबसे अच्छा समय रथ यात्रा उत्सव के दौरान होता है जो मार्च के महीने में दस दिनों के लिए आयोजित किया जाता है।



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