मणिपुर के व्यवसायिक गढ़ मोरेह जाने वाले पर्यटक पालेल शहर में ही रुकते हैं। इम्फाल से 46 किमी दूर यह शहर थौबल और चंदेल की सीमा पर पड़ता है और एनएच-39 यहीं से गुजरती है। यह ट्रांस-एशियन सुपर हाईवे का प्रवेशद्वार भी है।
पालेल चंदेल की पहाड़ियों और थौबल के मैदानों का संगम स्थल भी है। इस कारण यहां की खूबसूरती और भी बढ़ जाती है। मोरेह जाने के क्रम में इस इलाके का विहंगम नजारा देखने को मिलता है। कई पर्यटक तो सिर्फ यहां की प्राकृतिक सुंदरता के कारण ही इस जगह घूमने आते हैं।
वैसे तो यहां के लोगों की निर्भरता कृषि पर है, लेकिन पहाड़ी जनजातियां हस्तशिल्प वस्तुएं भी बेचती हैं। यहां पीढ़ियों से अलग-अलग समुदाय के लोग सौहार्द के साथ रहते आए हैं। यहां की कुछ प्रमुख जनजातियां मारियंग, कुकि, मीटी और लमकोंग हैं।



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