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आश्चर्यजनक : राजस्थान का एकमात्र ऐसा दुर्ग जो बिना नींव के चट्टानों पर खड़ा है

राजस्थान के इतिहास में झालावाड़ जिला अहम स्थान रखता है। इसी जिले में बना है गागरोन किला, जो दो तरफ से पानी, 1 तरफ से पहाड़ और 1 तरफ खाई से घिरा हुआ है। क्या आपको पता है यह जल दुर्ग राजस्थान ही नहीं बल्कि भारत का एकमात्र ऐसा किला है जिसकी कोई नींव नहीं है।

Gagron Fort

चलिए गागरोन के जल दुर्ग के इतिहास से आपको रू-ब-रू करवाते हैं

12वीं सदी में डोड राजा ने करवाया था निर्माण

इतिहासकारों से मिली जानकारी के अनुसार 7वीं से 14वीं सदी तक झालावाड़ के गागरोन दुर्ग का निर्माण किया गया था। इसका निर्माण 12वीं सदी के डोड राजा बीजलदेव ने करवाया था। इसके अगले लगभग 300 सालों तक खिंची राजपूतों ने यहां राज किया था। 13वीं में मुगल शासक अलाउद्दीन खिलजी ने इस किले पर चढ़ाई भी की थी लेकिन राजा जैतसिंह खिंची ने उसे हरा दिया।

Jal Fort

14वीं सदी तक गागरोन किला एक समृद्ध रियासत बन चुका था लेकिन कारन मालवा के मुस्लिम घुसपैठियों की नजर इसपर पड़ गयी। बताया जाता है कि सन् 1423 में होशंग शाह ने कुछ अन्य अमीर राजाओं के साथ मिलकर अपनी 30,000 सेना के साथ इस किले को घेर लिया और इसपर अपनी जीत का परचम लहरा दिया।

गागरोन किले की खासियत

गागरोन का किला कई मायनो में बेहद खास है। गागरोन का किला राजस्थान ही नहीं भारत का एकमात्र किला है जो बिना किसी नींव के नुकीली सीधी चट्टानों पर खड़ा है। राजस्थान के सभी किलों में आमतौर पर 2 परकोटे हैं लेकिन गागरोन के किले में 3 परकोटे हैं। इस किले में दो प्रवेश द्वार हैं। इनमें से एक नदी और दूसरा पहाड़ी की तरफ खुलता है। झालावाड़ जिले में स्थित यह किला काली सिंद्ध और आहू नदी के संगम स्थल पर बना है।

Jhalawar Fort

बताया जाता है कि किसी समय इस किले में 92 मंदिर थे और 100 सालों का पंचांग भी यहीं बनाया गया था। इस किले के इतिहास में कुल 14 युद्ध और 2 जौहर शामिल हैं। किले में गणेश पोल, नक्कारखाना, भैरवी पोल, किशन पोल, सिलेहखाना का दरवाजा आदि महत्पवूर्ण दरवाजे हैं। इसके अलावा दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, जनाना महल, मधुसूदन मंदिर, रंग महल आदि कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल भी हैं।

यूनेस्को की हेरिटेज लिस्ट में है शामिल

साल 2013 में राजस्थान के 5 किलों को यूनेस्को ने हेरिटेज लिस्ट में शामिल किया था, जिसमें गागरोन का किला भी शामिल है। इस किले के प्रवेश द्वार के पास ही सूफी संत ख्वाजा हमीनुद्दीन चिश्ती का दरगाह है। किले के बाहर सूफी संत मिठ्ठे शाह का दरगाह (मकबरा) है। प्रत्येक साल मुहर्रम के समय यहां मेले का आयोजन किया जाता है।

Fort Rajsthan

सन् 1338 से 1368 तक राजा प्रताप राव ने गागरोन पर शासन किया था। उनके शासनकाल में ही यह समृद्ध रियासत बना। बाद में वह सन्यासी संत पीपा बन गये, जो संत कबीर दास के समकालीन और उनके गुरुभाई भी थे। उनका मठ भी इस किले के पास स्थित है।

कैसे पहुंचे गागरोन जल दुर्ग

झालावाड़ सड़क मार्ग से राजस्थान के बड़े-बड़े और प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। राजस्थान के कई शहरों से झालावाड़ के लिए बसे आसानी से उपलब्ध है। गागरोन किले से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन झालावाड़ स्टेशन है जो यहां से 2 किमी की दूरी पर स्थित है। विमान से आने पर झालावाड़ से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट जयपुर है, जो यहां से 345 किमी दूर है। जयपुर से झालावाड़ के लिए आपको प्राईवेट गाड़ियां बुक करनी पड़ेंगी।

FAQs
गागरोन का किला क्यों प्रसिद्ध है?

गागरोन का किला एकमात्र ऐसा किला है जो पानी, पहाड़ और खाई से घिरा हुआ है। इसलिए इसे जल दुर्ग भी कहा जाता है। इस किले के ठीक बाहर सूफी संत मिठ्ठे शाह का मकबरा है जहां हर साल मुहर्रम के समय मेला लगता है।

गागरोन किले का निर्माण किसने करवाया?

गागरोन किले का निर्माण राजा बीजलदेव ने 12वीं सदी में करवाया था। यह एकमात्र ऐसा किला है जो दो तरफ से पानी से घिरा हुआ है। इस वजह से इसे जल दुर्ग भी कहा जाता है।

गागरोन किला कौन से जिले में स्थित है?

गागरोन किला जिसे जल दुर्ग भी कहा जाता है। यह राजस्थान के झालावाड़ जिले में स्थित है। इस किले की खासियत है कि इसकी कोई नींव नहीं बनायी गयी थी। यह सीधा चट्टानों पर टिका हुआ है।

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