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हिमाचल प्रदेश में स्थित छोटी एल्लोरा की गुफ़ाएँ, मसरूर रॉक कट मंदिर!

हिमाचल प्रदेश में काँगड़ा की घाटी में बसी है हिमाचल की एल्लोरा गुफ़ाएँ!

हिमालय की गोद में बसा हिमाचल प्रदेश राज्य सारी प्राकृतिक खूबूसरती से संपन्न है। मंत्रमुग्ध करती नदियों की कल-कल ध्वनि के खूबसूरत नज़ारों से लेकर पर्वत की विशाल चोटियां तक, मनोरम घाटियों से लेकर सुन्दर गर्म पानी के स्रोतों तक, किसी भी प्राकृतिक खूबसूरती की कमी नहीं है यहाँ। आप जैसे जैसे हिमाचल की वादियों में कदम रखते जाते हैं, वैसे-वैसे एक सुखद आश्चर्य आपका स्वागत करता जाता है और आपको एक मनोरम अनुभव का एहसास कराता है।

प्रकृति के इसी आदर्श स्थल में बसी है एक ऐसी रचना जो मानव द्वारा निर्मित अद्भुत कृतियों में शामिल है। जी हाँ, आज यहाँ हम बात कर रहे हैं मसरूर रॉक कट टेम्पल की, जिसका मतलब है पत्थर को काट कर बनाया गया मसरूर मंदिर। हिमाचल प्रदेश में बनी यह अद्भुत कृति एक ऐसी जगह है जो आपको अपनी शानदार खूबसूरती से आश्चर्य से भर देगी और एक अंजान और सपने के सच होने का अनुभव कराएगी।

तो चलिए आज हम चलते हैं इस अद्भुत रचना की सैर करने कुछ अचंभित कर देने वाली तस्वीरों के साथ!

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मसरूर रॉक कट मंदिर

मसरूर रॉक कट मंदिर

मसरूर मंदिर एक ही चट्टान को काट कर बनाया गया मंदिरों का समूह है। यह हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा घाटी में एक चट्टान के टीले पर बना हुआ है।

Image Courtesy: Kartik Gupta

मसरूर रॉक कट मंदिर

मसरूर रॉक कट मंदिर

स्थानीय लोगों के अनुसार इसे हिमालय का पिरामिड भी कहा जाता है। मंदिर का पूरा परिसर एक विशालकाय चट्टान को काट कर बनाया है। इसे बिल्कुल ही आदर्श रूप से भारतीय स्थापत्य शैली में बनाया गया है, जो हमें 6-8वीं शताब्दी में ले जाता है।

Image Courtesy:Jatin Arora

मसरूर रॉक कट मंदिर

मसरूर रॉक कट मंदिर

धौलाधार पर्वत और ब्यास नदी के परिदृश्य में स्थित, यह मंदिर एक सुरम्य पहाड़ी के उच्चतम बिंदु पर स्थित है। वैसे आज तक तो इस मंदिर के निर्माण की कोई ठीक तारीख तो मालूम चल नहीं पायी है, इसलिए कहा जाता है कि मंदिर को सबसे पहले सन् 1875 में खोज निकाला गया था।

Image Courtesy:Suman Wadhwa

मसरूर रॉक कट मंदिर

मसरूर रॉक कट मंदिर

मुख्य मंदिर वस्तुतः एक शिव मंदिर था पर अभी यहां श्री राम, लक्षमण व सीता जी की मुर्तियां स्थापित हैं।

Image Courtesy:Kartik Gupta

हिमालयी पिरामिड की पौराणिक कथा

हिमालयी पिरामिड की पौराणिक कथा

एक लोकप्रिय पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत में पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान इसी जगह पर निवास किया था और इस मंदिर का निर्माण किया। चूँकि, यह एक गुप्त निर्वासन स्थल था इसलिए वे अपनी पहचान उजागर होने से पहले ही यह जगह छोड़ कर कहीं और स्थानांतरित हो गए। कहा जाता है कि मंदिर का जो एक अधूरा भाग है उसके पीछे भी एक ठोस कारण मौजूद है।

Image Courtesy:Prakash1972 2000

हिमालयी पिरामिड की पौराणिक कथा

हिमालयी पिरामिड की पौराणिक कथा

आप मंदिर के अंदर जैसे ही जायेंगे, अंदर की वास्तुकला देख कर दंग रह जायेंगे कि कैसे एक पहाड़ को काट कर इस तरह से बनाया जा सकता है। कहीं कोई जोड़ नही, कोई सीमेंट नहीं केवल पहाड़ काट कर गर्भ गृह, मूर्तियां, सीढ़ियाँ और दरवाज़े बनाये गये हैं।

Image Courtesy:Monika rana

हिमालयी पिरामिड की पौराणिक कथा

हिमालयी पिरामिड की पौराणिक कथा

मंदिर के बिल्कुल सामने ही स्थित है मसरूर झील जो मंदिर की खूबसूरती में चार चाँद लगाता है। झील में मंदिर के कुछ अंश का प्रतिबिंब दिखाई देता है जो किसी जादू से कम नहीं दिखता। कहा जाता है कि इस झील को पांडवों द्वारा ही अपनी पत्नी, द्रौपदी के लिए बनवाया गया था।

Image Courtesy:Vikasjariyal

मंदिर की शानदार वास्तुकला और नक्काशियां

मंदिर की शानदार वास्तुकला और नक्काशियां

हालाँकि यह शैली पश्चिम और दक्षिण भारत के कई प्राचीन मंदिरों में देखने को मिल जाती है, पर भारत के उत्तरी भाग में यह कुछ अलग और अद्वितीय है। मंदिर की वास्तुकला और बारीक़ की गई नक्काशियां किसी भी इतिहास में रूचि रखने वाले व्यक्ति के लिए एक आदर्श स्थल है।

Image Courtesy:Suman Wadhwa

मंदिर की शानदार वास्तुकला और नक्काशियां

मंदिर की शानदार वास्तुकला और नक्काशियां

इस मंदिर को बनाने की अवधारणा ही थी, इसे शिव जी को समर्पित मंदिर बनाना। यहाँ कई ऐसे चौखट हैं जो शिव जी के सम्मान के दौरान मनाये जाने वाले त्यौहार के नज़ारे को दर्शाते हैं और ये नज़ारे आपको देश में कहीं और देखने को नहीं मिलेंगे।

Image Courtesy:Kartik Gupta

मंदिर की शानदार वास्तुकला और नक्काशियां

मंदिर की शानदार वास्तुकला और नक्काशियां

सुबह सुबह भोर के वक़्त, यह रचना एक कलात्मक परिदृश्य की तरह नज़र आती है जिसमें एक छाया नज़र आती है और यह ऐसी प्रतीत होती है जैसे कुछ हाथी एक साथ झुण्ड में खड़े वहीं जम गए हैं।

Image Courtesy:ROHEWALMS

मंदिर की शानदार वास्तुकला और नक्काशियां

मंदिर की शानदार वास्तुकला और नक्काशियां

जैसे-जैसे सूरज उगता जाता है, मंदिर के सारे भित्ति चित्र और नक्काशियां सूरज की रौशनी में और तेज़ के साथ चमकने लगते हैं।

Image Courtesy:Prakash1972 2000

मंदिर की शानदार वास्तुकला और नक्काशियां

मंदिर की शानदार वास्तुकला और नक्काशियां

पूरा धौलाधार व इसकी हिमाच्छादित चोटियां यहां से स्पष्ट नजर आती हैं। पूरा दृष्य ऐसा लगता है मानो किसी चित्रकार ने बड़ा सा चित्र बना कर आकाश में लटका दिया हो।

Image Courtesy:Vinaykant g

मंदिर की शानदार वास्तुकला और नक्काशियां

मंदिर की शानदार वास्तुकला और नक्काशियां

पहाड़ को काट कर ही एक सीढ़ी बनाई गई है जो आपको मंदिर की छत पर ले जाती है और यहां से पूरा गांव व धौलाधार की धवल चोटियां कुछ अलग ही नजर आती हैं।

Image Courtesy:Kartik Gupta

मंदिर की शानदार वास्तुकला और नक्काशियां

मंदिर की शानदार वास्तुकला और नक्काशियां

इसे हिमाचल का एल्लोरा भी कहा जाता है।

Image Courtesy:Kartik Gupta

मंदिर की शानदार वास्तुकला और नक्काशियां

मंदिर की शानदार वास्तुकला और नक्काशियां

मंदिर के पहाड़ी के ढलान पर जंगली क्षेत्र में फैली हुई विशाल निर्माण एवं वास्तु अवशेषों के आधार पर ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि प्राचीन समय में मसरूर मंदिर के आस-पास एक नगर रहा होगा।

Image Courtesy:Kartik Gupta

मंदिर की शानदार वास्तुकला और नक्काशियां

मंदिर की शानदार वास्तुकला और नक्काशियां

मुख्य मंदिर समूह के अतिरिक्त पहाड़ी की पूर्वी दिशा में कुछ शैलोत्कीर्ण गुफाएं एवं सम्मुख तालाब है, जो विद्वानों और पर्यटकों का ध्यान सहसा ही अपनी ओर आकृष्ट करती हैं। इन्हें देखकर ऐसा लगता है कि ये गुफाएं शैव-धर्मावलम्बियों एवं अनुयायियों के आवास-गृह थे।

Image Courtesy:Akashdeep83

मंदिर की शानदार वास्तुकला और नक्काशियां

मंदिर की शानदार वास्तुकला और नक्काशियां

तो अगली बार आप जब कभी भी हिमाचल प्रदेश की यात्रा पर जाएँ, इस दिव्य मंदिर के दर्शन करने ज़रूर जाएँ। मंदिर की गौरवशाली वास्तुकला और मंत्रमुग्ध कर देने वाली वाला परिदृश्य ज़रूर ही आपको अपनी खूबसूरती से सम्मोहित कर देगा।

Image Courtesy:Kartik Gupta

मंदिर के दर्शन का सही समय

मंदिर के दर्शन का सही समय

आप मसरूर मंदिर के दर्शन पूरे साल कभी भी कर सकते हैं पर इसका सबसे सही और उचित समय है मार्च से अक्टूबर के महीने।

Image Courtesy:Kartik Gupta

मंदिर पहुँचें कैसे?

मंदिर पहुँचें कैसे?

मसरूर मंदिर काँगड़ा घाटी से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आप काँगड़ा पहुँच कोई भी निजी कैब या टैक्सी बुक करा कर यहाँ तक पहुँच सकते हैं।

Image Courtesy:Kartik Gupta

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