यह मंदिर ऊना के बाहिया गांव में स्थित है। किंवदंती है कि पांडवो के परिवार के पुजारी का नाम धयूनसार था जिनका ज्रिक महाभारत में किया गया है। वह पुजारी भगवान शिव के भक्त थे। भगवान शिव ने उनसे प्रसन्न होकर उनको वरदान किया कि अगर कोई भक्त इस मंदिर में सच्चे मन से कुछ मांगेगा तो उसकी सारी मनोकामनांए पूरी हो जाएंगी।
पहले इस मंदिर को धयूनसारेश्वर सदाशिव तीर्थ के नाम से जाना जाता था। बाद में इसे धयूनसार महादेव मंदिर कहा जाने लगा। आज से लगभग 50 साल पहले इस मंदिर को स्वामी आंनद गिरि ने पुनर्निर्मित करवाया था।
यह स्वामी उत्तरकाशी के एक महान संत थे। शिवरात्रि के दौरान इस मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी संख्या दर्शन करने के लिए आती है। भगवान की मूर्ति पर दूध और दही चढ़ाया जाता है।



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