लोहागढ़ किले के अंदर स्थित भरतपुर संग्रहालय में अद्वितीय और पुरातन कलाकृतियाँ और पुरातात्विक संसाधन हैं। यह संग्रहालय पहले भरतपुर के शासकों का प्रशासनिक कार्यालय था और इसे “कचहरी कलां” के नाम से जाना जाता था। बाद में 1944 में इसे संग्रहालय में बदल दिया गया।
पहली शताब्दी की मूर्तियाँ इस संग्रहालय का प्रमुख आकर्षण हैं। यहाँ की आर्ट गैलरी में लघु चित्रों के अनेक नमूने हैं जो मूल रूप से अभ्रक, पीपल के वृक्ष, और पुराने लिथो पेपर की पट्टियों पर बने हैं। इस गैलरी में भरतपुर के महाराजाओं की अनेक पेंटिंग भी दर्शाई गई है। इस संग्रहालय में पर्यटक 18 वीं शताब्दी की बंदूकें और तोपें भी देख सकते हैं।
इस संग्रहालय को चार खण्डों में बाँटा गया है, पुरातत्व, बच्चों की गैलरी, शस्त्रागार, कला और शिल्प और उद्योग। संग्रहालय रोजाना सुबह 10 बजे से शाम 4:30 बजे तक खुला रहता है।



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