गोविंदगढ़ किला को पहले भंगियन दा किला कहा जाता था और अमृतसर जाने पर आप यहां जरूर जाएं। मिसल के गुज्जर सिंह भंगी की सेना ने 1960 में इस किले का निर्माण ईंट और चूने से करवाया था। इसमें चार विशाल दुर्ग, लोहे के दो मजबूत गेट और एक परकोटा भी है। 1805 से 1809 के बीच महाराजा रणजीत सिंह ने इस किले का पुनर्निर्माण करवाया था।
1849 में इस किले पर अंग्रेजों ने अधिकार जमा लिया। उन्होंने यहां दरबार हॉल, हवा महल और फांसी घर बनवाए। कहा जाता है 1919 में हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड कराने वाले जनरल डायर के रहने का स्थान फांसी घर के ठीक सामने था, ताकि वह कैदियों को दी जा रही फांसी का आनंद ले सकें।
आजादी के बाद 1948 में पाकिस्तान से भारत आने वाले अप्रवासी पाकिस्तानियों को अस्थाई सुरक्षा प्रदान करने के लिए भारतीय सेना ने किले को अपने नियंत्रण में ले लिया। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के ऐतिहासिक घटना का साक्षी रहे इस किले को 2006 में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंदर सिंह ने आम लोगों के लिए खोल दिया।



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