कॉर्बेट नेशनल पार्क - लुप्तप्राय जीवों से हसीन मुलाकात

कॉर्बेट नेशनल पार्क वन्य जीव प्रेमियों के लिए एक स्वर्ग है जो प्रकृति माँ की शांत गोद में आराम करना चाहते हैं। पहले यह पार्क (उद्यान) रामगंगा राष्ट्रीय उद्यान के नाम से जाना जाता था परंतु वर्ष 1957 में इसका नाम कॉर्बेट नेशनल पार्क (कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान) रखा गया। इस पार्क का नाम प्रसिद्द ब्रिटिश शिकारी, प्रकृतिवादी और फोटोग्राफर जिम कॉर्बेट के नाम पर रखा गया। उनकी प्रसिद्द पुस्तक “ मैन ईटर्स ऑफ कुमाऊं” में कुमाऊं में शिकार के अनुभवों का वर्णन किया गया है। पुस्तक में लेखक ने उस बाघ के शिकार का स्पष्ट वर्णन किया है जिसने कथित तौर पर 400 मनुष्यों को मार डाला था।

यह राष्ट्रीय उद्यान विशाल हिमालय की तलहटी में स्थित है और अपने हरे भरे वातावरण के लिए जाना जाता है। भारत जंगली बाघों की सबसे अधिक आबादी के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्द है और जिम कॉर्बेट पार्क लगभग 160 बाघों का आवास है। यह रामगंगा नदी के किनारे स्थित है और यहाँ के आकर्षक पर्यटन स्थलों का भ्रमण करने तथा साहसिक सफ़ारी के लिए पर्यटक यहाँ आते हैं।

इस पार्क में दिखाई देने वाले जानवरों में बाघ, चीता, हाथी, हिरण, साम्बर, पाढ़ा, बार्किंग हिरन, स्लोथ भालू, जंगली सूअर, घूरल, लंगूर और रेसस बंदर शामिल हैं। इस पार्क में लगभग 600 प्रजातियों के रंगबिरंगे पक्षी रहते है जिनमें मोर, तीतर, कबूतर, उल्लू, हॉर्नबिल, बार्बिट, चक्रवाक, मैना, मैगपाई, मिनिवेट, तीतर, चिड़िया, टिट, नॉटहैच, वागटेल, सनबर्ड, बंटिंग, ओरियल, किंगफिशर, ड्रोंगो, कबूतर, कठफोडवा, बतख, चैती, गिद्ध, सारस, जलकाग, बाज़, बुलबुल और फ्लायकेचर शामिल हैं। इसके अलावा यात्री यहाँ 51 प्रकार की झाडियाँ, 30 प्रकार के बाँस और लगभग 110 प्रकार के विभिन्न वृक्ष देख सकते हैं।

वे पर्यटक जो कॉर्बेट नेशनल पार्क के सुनसान जंगलों का भ्रमण करने की योजना बना रहे हैं वे ढिकाला भी जा सकते हैं जो पाटिल दून घाटी के किनारे स्थित है। ढिकाला से घाटी का मनोरम दृश्य देखा जा सकता है जिसकी पृष्ठभूमि में कांडा पर्वतश्रेणी है। ढिकाला के रास्ते से जाते हुए आपको जंगली हाथी, चीतल, हिरण और पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों को देखने का अवसर मिल सकता है। अनुभवी गाईड के साथ ट्रेकिंग पर जाना यहाँ की लोकप्रिय गतिविधि है जिसका आनंद पर्यटक यहाँ उठा सकते हैं। कलागढ़ बाँध एक अन्य स्थान है जो उद्यान के दक्षिण पश्चिम में स्थित है। यह स्थान पक्षियों को देखने के उत्तम अवसर प्रदान करता है। ठंड के मौसम के दौरान प्रवासी पक्षी मुख्य रूप से मुरगाबी यहाँ सामान्य रूप से देखी जा सकती है।

पर्यटक कॉर्बेट वॉटरफॉल्स (पानी के झरने) का आनंद भी उठा सकते हैं जो लगभग 60 फुट की ऊँचाई पर स्थित हैं। पार्क में पिकनिक या कैम्प के लिए यह एक आदर्श स्थान है। पार्क के बिजरानी और ढिकाला क्षेत्र में हाथी सफ़ारी (हाथी पर बैठकर सैर) उपलब्ध है। कॉर्बेट नेशनल पार्क आने वाले पर्यटकों के लिए कोसी नदी रॉफ्टिंग का अवसर प्रदान करती है। पार्क में स्थित विभिन्न रिसॉर्ट्स रिवर (नदी) रॉफ्टिंग के लिए आवश्यक उपकरण और सुविधाएँ प्रदान करते हैं। जंगल सफ़ारी जिसमें जीप सफ़ारी शामिल है पर्यटकों को असीमित आनंद प्रदान करते हैं। पर्यटक कोसी नदी के जलग्रहण क्षेत्र में मशीर फिशिंग का आनंद उठा सकते हैं। यहाँ कई रिसॉर्ट्स हैं जो फिशिंग (मछली पकड़ना) के लिए आवश्यक व्यवस्था करते हैं।

कालाढुंगी में स्थित कॉर्बेट संग्रहालय भी दर्शनीय स्थान है। यह प्रसिद्द ब्रिटिश शिकारी जिम कॉर्बेट का विरासत बंगला है यहाँ कुछ दुर्लभ चित्र और इस विशिष्ट व्यक्ति का कुछ निजी सामान भी रखा है। पर्यटक क्यारी कैम्प में रुक सकते हैं जो कुमाऊं की तलहटी में स्थित है। सोननदी वन्यजीवन अभयारण्य जंगल में एशियाई हाथियों और बाघों को देखने का अवसर प्रदान करता है।

रामगंगा नदी, मंडल नदी और सोनानदी नदी नेशनल पार्क की पारिस्थितिकी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पर्यटक यहाँ सोट्स भी देख सकते हैं जिसका स्थानीय भाषा में अर्थ मौसमी धाराएं होता है। सीताबनी मंदिर और रामनगर पार्क के अन्य महत्वपूर्ण आकर्षण हैं। इसके अलावा जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क हवाई मार्ग, रेल और रास्ते द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे इस पार्क की सैर गर्मियों में और ठंड के दौरान करें।

 

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