जैसा कि नाम से पता चलता है चीनी फिशिंग नेट का मूल उदभव चीन में हुआ। ये चीनी फिशिंग नेट भारत में कोच्चि में पहली बार चीनी यात्री ज़्हेंग हे द्वारा प्रयुक्त किये गए। पहली बार ये जाल चौदहवीं शताब्दी में कोच्चि बंदरगाह में स्थापित किये गए और तब से इनका उपयोग किया जा रहा है।
व्येपीन द्वीप और फोर्ट कोच्चि के समुद्र तटों पर चीनी फिशिंग नेट देखें जा सकते हैं। इस जाल की विशेषता इस तथ्य में है कि इन्हें मध्य हवा में झूले की तरह छोड़ा जा सकता है। ये जाल खंभों से लटके होते हैं जो बाँस या सागौन की लकड़ी से बनाए जाते हैं।
स्थानीय भाषा में इन फिशिंग नेट को चीनवाला कहा जाता है। चीनी नेट की मछली पकड़ने की पद्धति पारंपरिक पद्धति से बहुत अलग है। चीनी फिशिंग नेट को उठाने में कम से कम छह आदमियों की सहायता की आवश्यकता होती है। पर्यटक चीनी फिशिंग नेट की झलक पाने के लिए समुद्र तटों पर आते हैं और फिशिंग पर हाथ आजमाते हैं।



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