सुल्तान बत्तेरि - पर्वतों के बीच बसा ऐतिहासिक शहर

सुल्तान बत्तेरि, जिसे गणपतिवातोम भी कहा जाता है, केरल के वायनाड़ जिले का ऐतिहासिक शहर है। केरल - कर्नाटक बॉर्डर पर बसा यह शहर, एक दिन की पिकनिक के लिए उत्तम स्थान है। मैसूर के राजा टीपू सुल्तान ने इस पर आक्रमण कर, यहाँ बने जैन मंदिर को अपनी बैटरी के रूप में इस्तेमाल करने लगे, जिसके कारण इसका नाम सुल्तान बत्तेरि रखा गया। यह केरल का ऐतिहासिक शहर ही नहीं, बल्कि यहाँ की पहाड़ियों पर बिछी हरी भरी घास इस क्षेत्र को और भी मनोहर बनती है।

सुल्तान बत्तेरि, वायनाड़ का प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र है। यहाँ ज्यादातर लोग पर्यटन और कृषि के माध्यम से कमाते हैं। टीपू सुल्तान के आक्रमण ने इस क्षेत्र की संस्कृति और लोगों की जीवनशैली को बहुत प्रभावित किया है। कहा जाता है कि टीपू सुल्तान ने यहाँ भव्य किले का निर्माण किया, पर वह आज मौजूद नहीं है।

सुल्तान बत्तेरि के आस पास

एड़क्कल गुफाएँ और  वायनाड वन्यजीव अभयारण्य सुल्तान  बत्तेरि के सबसे लोकप्रिय पर्यटक गंतव्य हैं। 

प्राकृत सुन्दरता और सुगन्धित पहाड़ियाँ

सुल्तान बत्तेरि, ग्रामीण आबादी वाला सुन्दर गाँव है। मसालों की खेती के लिए प्रसिद्ध यह गाँव, चारों ओर अपने मसलों की खुशबू फैलता है। काफी ऊंचाई पर स्थित होने के कारण, हर मौसम में यहाँ का वातावरण बड़ा सुहावना बना रहता है।

बॉर्डर पर बसे इस सुन्दर शहर तक आप केरल या कर्नाटक दोनों राज्यों से आ सकते हैं। दक्षिण भारत के कई प्रमुख शहर जैसे बैंगलोर, मैसूर, कालीकट और कन्नूर से रोड मार्ग द्वारा पहुंचा जा सकता है। यहाँ की प्रकृति सुन्दरता और शांत वातावरण सुल्तान बत्तेरि को उत्तम हॉलिडे स्पॉट बनते हैं

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