मलयाट्टूर : जहाँ प्रकृति संस्कृति से मिलती है

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मलयाट्टूर, एर्नाकुलम जिले में स्थित एक छोटा सा शहर है जिसका नाम मलयालम शब्दों ‘माला’ अर्थात ‘पर्वत’, ‘अर्र’ अर्थात नदी और ‘उर’ अर्थात ‘स्थान’ पर पड़ा। यह छोटा परंतु सुंदर शहर पश्चिमी घाटों और पेरियार नदी के बीच स्थित है जो इसे भूमि, जल और पर्वत श्रृंखलाओं का संगम बिंदु बनाते हैं।

मलयाट्टूर शहर अपने प्राचीन कैथोलिक चर्चों के लिए प्रसिद्द है जो देवदूत सेंट थॉमस को समर्पित है। मलयाट्टूर न सिर्फ ईसाई लोगों का धार्मिक स्थान है बल्कि यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है। इसके अल्वा सेंट थॉमस चर्च जो यहाँ का प्रमुख आकर्षण है, के अलावा यहाँ अन्य कई चर्च है जैसे चर्च ऑफ मेरी इम्मेक्युलेट और सेंट सेबस्टियन चर्च। दुर्गा देवी मंदिर एक अन्य धार्मिक स्थान है जो यात्रियों को आकर्षित करता है। मलयाट्टूर की यात्रा के दौरान महागनी थोटटम् और मूलमकुझे की भी सैर की जा सकती है।

देव भूमि के मौसम और ज़ायके

विश्वासी और पर्यटक पूरे वर्ष में कभी भी यहाँ की यात्रा करते हैं क्योंकि चर्च में कुछ न कुछ गतिविधियाँ चलती रहती हैं। परंतु वर्षा के लंबे मौसम में यहाँ की यात्रा टालनी चाहिए क्योंकि भारी वर्षा के कारण दृश्य स्थानों की सैर असंभव हो जाती है। ठंड का मौसम मलयाट्टूर की सैर के लिए उत्तम है क्योंकि तापमान खुशनुमा होता है। मलयाट्टूर कोच्चि से लगभग 47 किमी. की दूरी पर स्थित है और अपने पड़ोसी जिलों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

यहाँ बनाए जाने वाले खाने में ठेठ मलयालम ज़ायका होता है। खाद्य पदार्थों की और कॉफी की छोटी दुकानें इस स्थान की विशेषता है। त्योहारों के मौसम के दौरान जब शहर गतिविधियों से भरा होता है तब तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए खाद्य पदार्थों की अस्थाई दुकानें बनाई जाती हैं।

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