कोलार एक छोटा और शांत शहर है जो कर्नाटक के पूर्वी सिरे पर स्थित है। लगभग 3,969 किमी. के क्षेत्र में फैला हुआ यह शहर तमिलनाडु के साथ साथ आंध्रप्रदेश की सीमा के साथ भी लगा हुआ है जिसके कारण इसे “कर्नाटक का पूर्वी प्रवेश द्वार” कहा जाता है। आज कोलार अपनी सोने की खदानों के लिए प्रसिद्ध है परंतु इसका सोने जैसा इतिहास भी है – ऐसा इतिहास जिसने इस शहर को कुछ भव्य मंदिर और किले प्रदान किये।
कोलार के विषय में किवदंतियाँ
कोलार के बारे में एक मिथक और किवदंती यह है कि यह स्थान प्राचीन संत वाल्मिकी का निवास स्थान था। अपने निष्कासन के बाद भगवान राम यहाँ आये थे तथा भगवान राम द्वारा त्याग दिए जाने पर देवी सीता भी यहीं आकर रुकी थी। उनके पुत्रों लव और कुश का जन्म कोलार में वाल्मिकी के आश्रम में हुआ था। प्रसिद्ध योद्धा तथा संत परशुराम कोलार की पश्चिमी पहाड़ियों में रहते थे।
जहाँ तक इतिहास की बात है कोलार का नाम इसके इतिहास की याद दिलाता है। कोलार नाम कोलाहलापुरा से निकला है जिसका अर्थ है “हिंसक शहर”। इस छोटे शहर ने चोल तथा चालुक्य राजवंशों के बीच के हिंसात्मक युद्ध को देखा है।
कोलार में तथा इसके आसपास पर्यटन स्थल
इस शहर के वैभवशाली इतिहास के अवशेष आज भी यहाँ देखे जा सकते हैं। कोलारम्मा तथा सोमेस्वर मंदिर भी दर्शनीय हैं। पर्यटकों के लिए उपलब्ध अन्य गतिविधियों में पैरासेलिंग और रॉक क्लायम्बिंग शामिल हैं।
कोलार कैसे पहुंचे
कोलार बैंगलोर से 65 किमी. की दूरी पर स्थित है तथा रेल और रास्ते द्वारा आसानी से जुड़ा हुआ है। कोलार की यात्रा के लिए उत्तम समय
कोलार की यात्रा का सबसे अच्छा समय
कोलार की यात्रा के लिए जुलाई से सितंबर के बीच का समय सबसे अच्छा होता है।



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