कभी सोमावंसिया सम्राटों के शासन में रहा, महासमुंद पारंपरिक कला और संस्कृति का एक केंद्र है। महासमुंद छत्तीसगढ़ के मध्य पूर्वी हिस्सा में है। सिरपुर, इस क्षेत्र का सांस्कृतिक केंद्र है, जिसकी वजह से काफी बड़ी संख्या में पर्यटक साल भर यहाँ आते है। यह महानदी नदी से किनारों पे बसा हुआ है। यह क्षेत्र चूना पत्थर और ग्रेनाइट चट्टानों से भरा पड़ा है।
महासमुंद की संस्कृति
कई जनजातियां जैसे बहलिया, हल्बा, मुंडा , सोनार , संवारा , पारधी, आदि इस क्षेत्र में रहते हैं। जनजातीय संस्कृति, आदिवासी मेलों और त्योहार यहाँ से रोज़मर्रा के जीवन का अभिन्न हिस्सा है। यहाँ के लोगों का पहनावा एकदम पारंपरिक है, पुरुष धोती , कुर्ता , पगड़ी और चमड़े का जूता अतः भंदायी पहनते है और महिलाएं साड़ी पहेनती हैं। अत्करिया पारंपरिक जूते है। बिछिया , करधन या कमर बंद , पर्पत्ति या कोण बैंड , फूली या चांदी की बालियों जैसे गहने यहाँ की महिलाएं पहनती हैं। त्योहारों को धूम धाम से मनाना उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
महासमुंद में और आसपास के पर्यटक स्थल
महासमुंद में और आसपास पर्यटकों के आकर्षण में, लक्ष्मण मंदिर, आनंद प्रभु कुडी विहार , भाम्हिनी की स्वेत गंगा, खाल्लारिमाथा मंदिर , घुधरा ( दलदली ) , चंडी मंदिर ( बिरकोनी ) , चंडी मंदिर ( गुछापाली) , स्वास्तिक विहार , गंधेस्वर मंदिर , खल्लारी माता मंदिर आदि है।
महासमुंद तक कैसे पहुंचे
सड़क मार्ग, रेल और हवाई यात्रा कर बड़ी ही आसानी से महासमुंद तक जाया जा सकता है।



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