श्री मयूरानाथस्वामी मंदिर को मयीलाडूतुरै के सबसे बड़े मंदिरों में से गिना जाता है। मयूरानाथ स्वामी का शाब्दिक अर्थ होता है - मयूरों का पति, जो इस मंदिर के मुख्य देवता के रूप में पूजे जाते है। किंवदंती है कि माता पार्वती को भगवान शिव के गुस्से के चलते उनका सहयोग नहीं मिला और शिव ने पार्वती को शाप दे दिया कि वह अगले जन्म में मोरनी के रूप में जन्म लेगी।
मयूरा को माता पार्वती का ही रूप माना जाता है। इस मंदिर में भगवान शिव की भी पूजा की जाती है। इस मंदिर में एक लिंग भी स्थित है जिसके बारे में कई कहानियां यहां प्रसिद्ध है। इस मंदिर की दीवारों पर कुलोथुंगा चोल वंश के शिलालेख लिखे हुए है।
यह उस वंश के समय का सबसे बड़ा और उत्तम निर्माण है जो आज भी खड़ा है। इस मंदिर में हर साल विशेष प्रकार के नृत्य का आयोजन किया जाता है। पर्यटक, मयीलाडूतुरै की सैर के दौरान इस मंदिर में दर्शन करने अवश्य आएं।



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