पालमपुर की यात्रा करने वाले पर्यटकों के लिये चाय के बागान प्रमुख आकर्षण है। शहर के विशाल चाय बागानों के कारण पालमपुर उत्तर पश्चिमी भारत की चाय राजधानी के रूप में जाना जाता है। कई एकड़ भूमि में फैले हुए ये चाय के बागान इस क्षेत्र के अनेक स्थानीय लोगों की जीविका का साधन हैं।
इस क्षेत्र में चाय बागान का प्रारंभ 19 वीं सदी के मध्य में डॉ. जेमिसन, जो उत्तर - पश्चिम सीमांत प्रांत में बॉटनिकल गार्डन के अधीक्षक थे, के द्वारा किया गया। चाय के बागानों की ख्याति के कारण पालमपुर का नाम अंतर्राष्ट्रीय नक्शे में 1883 में शामिल किया गया। यहां पर पैदा होने वाली चाय की किस्म कांगड़ा चाय सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। यह चाय सिर्फ इसी इलाके में होती है और बाजार में दरबारी, बागेश्वरी, बहार और मल्हार के नाम से बेची जाती है। चाय के सभी ब्रांडों के नाम संगीत के राग पर आधारित हैं।



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