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यादवेंद्र गार्डन, पंचकूला

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यादवेंद्र गार्डन या पिंजौर गार्डन पिंजौर में स्थित है। पटियाला राजवंश के शासकों द्वारा निर्मित यह बगीचा मुग़ल शैली जैसा लगता है। यह 17वीं शताब्दी में औरंगज़ेब के शासनकाल के दौरान बनवाया गया था। यादवेंद्र गार्डन नाम पटियाला के महाराज यादवेंद्र सिंह को समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि यादवेंद्र गार्डन उत्तर भारत का सबसे पुराना और सुंदर बाग है। कमरे और रेस्तरां के साथ रोशन फव्वारे यात्रियों को समर्पित हैं।

यादवेंद्र गार्डन चंडीगढ़ से 22कि.मी. दूर है। इस गार्डन में कई छतें हैं और इसके बीच में राजस्थान-मुग़ल शैली में निर्मित एक महल भी स्थित है। इसकी पहली छत पर स्थित महल शीशमहल और हवामहल से जुड़ा हुआ है। इसका मुख्य द्वार इस छत पर खुलता है। दूसरी छत पर रंगमहल है जबकि तीसरी छत पर पेड़, फूल और फलों का बगीचा है।

अगली छत पर फव्वारों के साथ जलमहल स्थित है जहाँ आराम करने के लिए एक मंच भी बना हुआ है। इससे अगली छत पर पेड़ ओर फव्वारें मौजूद हैं जबकि आखिरी छत पर एक डिस्क के आकार में ओपन एअर थिएटर बना हुआ है। इस बाग के साथ एक चिडि़याघर भी स्थित है।

इस परिसर में एक मंदिर और एक खुला संग्रहालय भी है जिनमें रोशनी की अच्छी व्यवस्था है और जो उचित रास्तों से भली प्रकार से जुड़े हैं। परिसर में हैरिटेज ट्रेन एक नया विचार है जो पूरे बगीचे ओर स्मारकों से होते हुए गुज़रती है।

यह कौशल्या और झज्जर नदियों के पास स्थित हे जो घग्गर नदी की सहायक नदियाँ हैं। इसका नाम पंचपुरा से लिए जाने के कारण इसका ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व भी है। पंचपुरा पांडवों का शहर था। शिवालिक पर्वतमाला से मिलने के कारण यहाँ के नज़ारों सुंदरता बढ़ जाती है।

अप्रैल में बैसाखी और जून व जुलाई में मैंगो फेस्टिवल पर्यटकों को यहाँ आकर्षित करते हैं। 2006 में हरियाणा सरकार द्वारा पिंजौर हेरिटेज फेस्टिवल शुरु किया गया था। पिंजज्ञेर शहर की गौरवशाली प्राचीन विरासत और यादवेंद्र गार्डन की भव्यता इस फेस्टिवल में मनाई जाती है। इस फेस्टिवल के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों की व्यवस्था की जाती है जिसमें प्रसिद्ध कलाकार भाग लेने के लिए आते हैं।

भीमदेवी मंदिर और प्राचीन स्नान यादवेंद्र गार्डन के पास स्थित है। देश के किसी भी कोने से सड़क, रेल तथा हवाईमार्ग से यहाँ पहुँचा जा सकता है। शिमला के रास्ते पर स्थित कालका यहाँ से 5कि.मी. दूर है। पिंजौर पाषाणयुग के टावरों के उपकरणों के लिए भी प्रसिद्ध है। इस क्षेत्र में खुदाई करने पर कई अन्य मूर्तियाँ और प्राचीन अवशेष मिले हैं जो 10वीं शताब्दी के हैं। ऐसा माना जाता है कि डेढ़ करोड़ साल पहले इस इलाके में आदमी रहता है।

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