सारनाथ में भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण (एएसआई) 1907 से खुदाई का काम कर रहा है। इस दौरान यहां बौद्ध धर्म के जन्म और विकास से जुड़ी कई चीजें मिली हैं। खुदाई के मुख्य स्थान पर कई स्मारक और ढांचे हैं।
यहां मिले प्रचीन अवशेषों पर संकेत और प्रतीक खुदे हुए हैं। इन्हें बौद्ध धर्म के बारे में बताने और इसे फैलाने के लिए रूपांकित किया गया था। खुदाई के दौरान ही निकाला गया 250 ईसा पूर्व का अशोक स्तंभ सबसे ज्यादा जिज्ञासा जगाता है। यहां धमेख स्तूप भी है, जिसे भारतीय इतिहास में गुप्तकाल के दौरान बनवाया गया था।
इसके अलावा यहां चौथी शताब्दी से 12वीं शताब्दी के बीच बने कई मठ भी हैं। इस जगह की ओर इतिहासकारों और बौद्ध विद्वानों का काफी रुझान रहता है। वे लोग यहां आकर स्तंभो पर अंकित लिखावट को समझने की कोशिश करते हैं और उस दौर के बारे में जानकारी जुटाते हैं, जब इन मठों और ढांचों का निर्माण किया गया था।



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