वल्लारोट्टाई मुरुगन मन्दिर श्रीपेरंबदुर से 9 किमी की दूरी पर वल्लाकोट्टाई गाँव में स्थित है और 1200 साल पुराना है। मन्दिर के अन्दर भगवान मुरुगन की 7 फीट ऊँची प्रतिमा है जो तमिलनाडु में सबसे ऊँची भगवान की प्रतिमा है। भगवान मुरुगन की पत्नियों तेवयानई और वल्ली की प्रतिमायें उनके दोनों तरफ हैं।
ऐसी मान्यता है कि अपना साम्राज्य वापस पाने के लिये राजा भागरीथन ने सन्त धुर्वसुर की सलाह पर इस मन्दिर का निर्माण कराया। एक अन्य मान्यता के अनुसार वल्लन नामक राक्षस देवों को परेशान करता था और भगवान मुरुगन ने उसे परास्त कर क्षेत्र में शांति बहाल की, इसलिये उनके सम्मान में मन्दिर का निर्माण किया गया।
मन्दिर में एक कुण्ड है, जिसे वज्र तीर्थम् कहा जाता है और ऐसा माना जाता है कि इसे भगवान इन्द्र क वज्र-आयुधम द्वारा स्थापित किया गया था। भगवान इन्द्र ने इस कुण्ड का उपयोग भगवान सुब्रमण्य की पूजा के लिये किया था। इस मन्दिर में श्री विनयगर, श्री अम्बाल, उत्सव मुरुगर और श्री शानमुगर की मूर्तियाँ भी हैं। अर्ध मण्डपम के स्तम्भों पर श्री अंजनेयार के घेरे थापस कामाक्षी और भगवान राम की तराशी मूर्तियाँ देखी जा सकती हैं। समय प्रातः 5-30 से दोपहर 1 बजे और दोपहर 3 बजे से रात 8-30 बजे तक।



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