श्रीरंगापट्नम की ओर जाते हुए यात्रियों को गंगा नदी के किनारे नौवीं शताब्दी में बना श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर अवश्य देखना चाहिए।यह मंदिर उन सबसे बड़े मंदिरों में से एक है जो बाद में विजयनगर और होयसला वंश के शासकों द्वारा सुधारें गए। भगवान विष्णु का एक रूप, भगवान रंगनाथ को समर्पित यह मंदिर ‘पंचरंगा क्षेत्राम्‘ में से एक है। इस मंदिर में मुस्कुराते हुए भगवान की मूर्ति प्रतिष्ठित है जो काले पत्थर से बनी है।
गर्भगृह में स्थापित मूर्ति अनंत नाग पर सोते हुए देव को दर्शाती है। भगवान विष्णु के 24 प्रकार दर्शाते खूबसूरत स्तंभ मंदिर के चारों ओर हैं जो स्मारक का आकर्षण बढ़ाते हैं।इसकी भीतरी दीवारों पर भगवान श्रीनिवास व पंचमुख अंजनेय की विभिन्न छवियाँ बनी हैं।
कर्नाटक के सबसे बड़े मंदिरों में से एक इस तीर्थ में विशाल टावर और स्तंभयुक्त हाल के साथ एक महाद्वार है जो तीन या चार चरणों में निर्मित हुआ। पर्यटक यहाँ संक्रांति के दिन आ सकते हैं जब 1लाख दीपक जलाए जाते हैं और जिसे लक्षद्वीपोत्सव कहते है। यह मंदिर पूरा साल खुला रहता है और पूजा का समय सुबह 8बजे से 9:30बजे तक तथा शाम 7बजे से 8बजे तक है।



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